एसटी की अतिरिक्त जमीनों का पीपीपी मॉडल पर होगा विकास, 98 साल तक लीज की अनुमति
महामंडल की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार का फैसला, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित

मुंबई। महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) के कब्जे वाली अतिरिक्त जमीनों का अधिकतम व्यावसायिक उपयोग कर महामंडल की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार सरकार ने एसटी की अतिरिक्त जमीनों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित करने और इसके लिए 49+49 वर्ष यानी अधिकतम 98 वर्ष तक की लीज देने को मंजूरी दी है। इस फैसले से एसटी महामंडल की संपत्तियों के जरिए नियमित और दीर्घकालीन आय का नया स्रोत तैयार होने की उम्मीद है। विकास प्रक्रिया के संचालन और निगरानी के लिए परिवहन मंत्री एवं एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य एसटी की उपलब्ध जमीनों का योजनाबद्ध, पारदर्शी और व्यावसायिक उपयोग कर महामंडल की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। पीपीपी मॉडल के तहत निजी भागीदारों के माध्यम से इन जमीनों पर व्यावसायिक और अन्य उपयोगी परियोजनाएं विकसित की जा सकेंगी। शासन निर्णय के अनुसार, एसटी महामंडल की स्वामित्व वाली जमीन, भूमि अधिग्रहण के जरिए प्राप्त जमीन, पूर्व रोड ट्रांसपोर्ट विभाग से हस्तांतरित संपत्तियां, लीज पर मिली जमीन तथा उपहार पत्र के माध्यम से प्राप्त भूखंडों पर भी निर्धारित शर्तों के तहत पीपीपी परियोजनाएं लागू की जा सकेंगी। सरकार का मानना है कि लंबे समय तक उपयोग में नहीं आ रही अथवा अपनी पूरी व्यावसायिक क्षमता के अनुरूप इस्तेमाल नहीं हो रही जमीनों का विकास होने से महामंडल को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। साथ ही बस अड्डों और संबंधित परिसरों में यात्री सुविधाओं तथा व्यावसायिक बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। नई नीति के तहत प्रत्येक भूखंड और परियोजना के लिए तय प्रक्रिया के अनुसार प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। उच्चस्तरीय समिति परियोजनाओं की व्यवहार्यता, आर्थिक लाभ और विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी। एसटी महामंडल की आर्थिक मजबूती के लिहाज से यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीनों के व्यावसायिक विकास से मिलने वाली दीर्घकालीन आय का उपयोग महामंडल की सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकेगा।
