आंध्र प्रदेश के सफल मत्स्य मॉडल को महाराष्ट्र में अपनाने की तैयारी: मंत्री नितेश राणे

AI, IoT, स्मार्ट फीडिंग, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी और आधुनिक एक्वाकल्चर तकनीकों से मछुआरों की आय बढ़ाने पर जोर

मुंबई। महाराष्ट्र में मत्स्य उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात तक हर चरण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आंध्र प्रदेश में सफलतापूर्वक लागू की गई उपयोगी तकनीकों और व्यवस्थाओं का महाराष्ट्र में प्रभावी इस्तेमाल किया जाएगा। शुक्रवार को मत्स्यव्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने कहा कि इसका उद्देश्य मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ राज्य में सक्षम, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मत्स्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। आंध्र प्रदेश के दो दिवसीय अध्ययन दौरे के दौरान मंत्री राणे ने वहां के मत्स्य आयुक्तालय मुख्यालय का दौरा कर मत्स्यव्यवसाय और एक्वाकल्चर क्षेत्र के विकास मॉडल का विस्तार से अध्ययन किया। उन्होंने आधुनिक तकनीक, उत्पादकता वृद्धि, मछुआरा कल्याण और एकीकृत मत्स्य मूल्य श्रृंखला से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मत्स्य आयुक्तालय में आयोजित बैठक के दौरान समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य व्यवसाय तथा एक्वाकल्चर की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही तकनीकों पर चर्चा हुई। इसमें AI आधारित ‘Aquaculture 4.0’, मछलियों के स्वास्थ्य और रोग की निगरानी, पानी की गुणवत्ता की रियल टाइम मॉनिटरिंग, स्मार्ट फीडिंग और मछलियों के व्यवहार का विश्लेषण जैसी तकनीकें शामिल हैं।
इसके अलावा RAS और बायोफ्लॉक प्रणाली, IoT आधारित एक्वाकल्चर, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, तालाबों का पंजीकरण, प्रजातियों का विविधीकरण, नावों की ट्रैकिंग और मछली पकड़ने की निगरानी से संबंधित व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई। दौरे में समुद्री शैवाल की खेती, कृत्रिम प्रवाल भित्तियों का निर्माण, खुले समुद्र में केज कल्चर, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल तटीय मछुआरा गांव और अंतर्देशीय जलस्रोतों के वैज्ञानिक उपयोग जैसे विषयों का भी अध्ययन किया गया। मंत्री राणे ने हैचरी, मत्स्य आहार, प्रयोगशालाओं, मत्स्य पालन, प्रसंस्करण उद्योग, कोल्ड स्टोरेज, घरेलू बाजार और निर्यात को आपस में जोड़ने वाली एकीकृत मत्स्य मूल्य श्रृंखला के मॉडल की जानकारी ली। आंध्र प्रदेश में तकनीक और डेटा आधारित प्रबंधन के जरिए उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात के प्रत्येक चरण में उत्पादकता तथा आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों के साथ अंतर्देशीय जलस्रोतों का अधिक वैज्ञानिक और उत्पादक उपयोग करने पर भी सरकार का जोर रहेगा। अध्ययन दौरे में सामने आए उपयोगी प्रयोगों को लागू कर मछुआरों, मत्स्य किसानों और तटीय समुदायों के लिए अधिक आर्थिक अवसर तथा मूल्य संवर्धन सुनिश्चित करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान आंध्र प्रदेश के मत्स्य आयुक्त रामा नाईक, अतिरिक्त संचालक डॉ. शंकर राव, महाराष्ट्र के पशुसंवर्धन, दुग्ध विकास एवं मत्स्यव्यवसाय विभाग के सचिव एन. रामास्वामी, मत्स्य आयुक्त भानुदास पालवे, महाराष्ट्र मत्स्योद्योग महामंडल के प्रबंध निदेशक प्रकाश खपले, मत्स्य विशेषज्ञ मनोज शर्मा, सहआयुक्त महेश देवरे और नागनाथ भादुले सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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