नाना पाटेकर के निधन से महाराष्ट्र शोकाकुल, सीएम फडणवीस और डीसीएम शिंदे ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री बोले—‘क्रांतिवीर’ से ‘नटसम्राट’ तक उनके अभिनय की कोई बराबरी नहीं, शिंदे ने कहा—महाराष्ट्र का बुलंद और बाणेदार स्वर शांत हो गया

मुंबई। वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। दोनों नेताओं ने नाना पाटेकर के अभिनय के साथ-साथ उनके सामाजिक कार्यों और किसानों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को भी याद किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने शोक संदेश में कहा कि भारतीय फिल्म जगत ने नाना पाटेकर के रूप में मराठी मिट्टी से जुड़ा एक सशक्त, बेबाक और संवेदनशील अभिनेता खो दिया है। उन्होंने कहा कि ‘क्रांतिवीर’ से ‘नटसम्राट’ तक नाना पाटेकर ने अपने दमदार और प्रभावशाली अभिनय से एक अलग मुकाम बनाया। मराठी और हिंदी सिनेमा में उनका योगदान एक पूरे दौर का प्रतिनिधित्व करता है। फडणवीस ने कहा कि नाना पाटेकर केवल पर्दे पर ही बड़े कलाकार नहीं थे, बल्कि निजी जीवन में भी बड़े दिल वाले इंसान थे। उनका स्पष्टवादिता और बेबाक अंदाज उनके व्यक्तित्व की पहचान था। वे जहां भी जाते, अपनी मौजूदगी से अलग छाप छोड़ते थे। मुख्यमंत्री ने नाना पाटेकर के सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा कि जलयुक्त शिवार अभियान के दौरान उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर सहयोग किया था। अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ स्थापित नाम फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने किसानों और सूखाग्रस्त परिवारों की मदद के लिए जमीन पर उतरकर काम किया। फडणवीस ने कहा कि किसानों की मदद हो या सूखे के समय सहायता का सवाल, नाना हमेशा आगे रहते थे। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर का अचानक चले जाना कला और सामाजिक क्षेत्र दोनों के लिए बड़ी क्षति है। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नाना पाटेकर को याद करते हुए कहा कि रंगमंच और फिल्मों में अभिनय की ऊंचाइयों को छूने वाले नाना ने संवाद अदायगी से लेकर भाव-अभिनय तक अपनी अलग शैली बनाई थी। उनका निधन फिल्म जगत, महाराष्ट्र और व्यक्तिगत रूप से उनके लिए बड़ा आघात है। शिंदे ने बताया कि कुछ ही समय पहले पुणे स्थित नाना पाटेकर के घर गणपति दर्शन के दौरान उनसे मुलाकात हुई थी, जो अब उनकी अंतिम मुलाकात साबित हुई। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर “अभिनय की एक जीवंत पाठशाला” थे और ‘नटसम्राट’ में उनके संवाद आज भी दर्शकों के मन में बसे हुए हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्मों में जितना प्रभावशाली उनका व्यक्तित्व था, असल जिंदगी में वे उतने ही सरल और जमीन से जुड़े इंसान थे। नाम फाउंडेशन के जरिए किसानों और सूखाग्रस्त परिवारों के लिए किया गया उनका काम महाराष्ट्र कभी नहीं भूलेगा। शिंदे ने अपनी व्यक्तिगत याद साझा करते हुए कहा कि वे हर वर्ष पुणे स्थित नाना के घर गणपति दर्शन के लिए जाते थे। नाना पाटेकर उनके दरे स्थित निवास पर भी आए थे और खेती तथा गाद निकालने के कार्यों का जायजा लिया था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि निजी मुलाकातों में नाना पाटेकर अक्सर उनकी पीठ पर हाथ रखकर “क्या क्रांतिवीर…” कहकर पुकारते थे। शिंदे ने कहा कि वह स्नेह और प्रोत्साहन वे कभी नहीं भूल सकते। उपमुख्यमंत्री ने कहा, “महाराष्ट्र का बुलंद और बाणेदार स्वर शांत हो गया है। मैंने एक सच्चा और दिलदार मित्र खो दिया है। उनके जैसा अभिनेता शताब्दी में कभी-कभार जन्म लेता है।” शिंदे ने यह भी कहा कि कश्मीर के बच्चों के लिए स्कूल शुरू करना नाना पाटेकर का एक सपना था और उसे पूरा करने में हर संभव सहयोग करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे दोनों ने पाटेकर परिवार, उनके मित्रों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि नाना पाटेकर का अभिनय और सामाजिक योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

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