मैट्रिमोनियल साइट पर युवती को प्रेमजाल में फंसाकर ₹7.50 लाख की ठगी, बिहार से छह साइबर ठग गिरफ्तार
शामगढ़ पुलिस ने ढाई महीने की जांच के बाद गिरोह तक पहुंच बनाई, देशभर में ₹11 करोड़ की ठगी का हिसाब मिला, 150 म्यूल बैंक खातों पर कार्रवाई

मंदसौर, मध्य प्रदेश। जिले की शामगढ़ पुलिस ने मैट्रिमोनियल साइट के जरिए युवती को प्रेमजाल में फंसाकर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बिहार के पूर्वी चंपारण और गोपालगंज से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने शामगढ़ की एक युवती से करीब ₹7.50 लाख की ठगी की थी। इसी मामले की जांच करते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंची। अब तक की जांच में गिरोह से जुड़े करीब ₹11 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन और ठगी का हिसाब सामने आया है। एसपी विनोद कुमार मीना ने बताया कि शामगढ़ की युवती ने एक मैट्रिमोनियल साइट पर अपनी फोटो और बायोडाटा अपलोड किया था। आरोपियों ने वहीं से उसे निशाना बनाया और पहले बातचीत बढ़ाकर उसे प्रेमजाल में फंसाया। इसके बाद उसे बताया गया कि विदेश से उसके लिए एक गिफ्ट भेजा गया है, जिसे कस्टम विभाग ने रोक लिया है और उसे छुड़ाने के लिए रुपये जमा कराने होंगे। युवती ने बताए गए बैंक खाते में रकम भेज दी। इसके बाद गिरोह के सदस्यों ने कथित तौर पर कस्टम और नारकोटिक्स अधिकारी बनकर युवती को फोन किया। उसे बताया गया कि विदेश से आए गिफ्ट में मादक पदार्थ मिला है। कार्रवाई का डर दिखाकर उससे अलग-अलग खातों में और रुपये जमा कराए गए। इस तरह आरोपियों ने युवती से करीब ₹7.50 लाख वसूल लिए। ठगी का अहसास होने पर युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। एसपी मीना के नेतृत्व में पुलिस ने करीब ढाई महीने तक मामले की जांच करते हुए गिरोह के नेटवर्क का पता लगाया। गिरफ्तार आरोपियों में त्रिलोकी कुमार (26), शिवम (25), बबलू कुशवाह (25), गुंजन (29) और शशि कुमार (24) शामिल हैं। ये सभी भेलाही थाना क्षेत्र, जिला पूर्वी चंपारण, बिहार के निवासी बताए गए हैं। इसके अलावा पुलिस ने गिरोह के कथित मास्टरमाइंड टोनी कुमार (34), निवासी छपिया, गोपालगंज, बिहार को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान देशभर में इस्तेमाल किए जा रहे करीब 150 म्यूल बैंक खातों की जानकारी सामने आई है और इन खातों में लेन-देन रुकवाने की कार्रवाई की गई है। इनमें करीब ₹20 लाख जमा होने की जानकारी मिली है, जबकि करीब ₹15 लाख की रकम वाले अन्य खातों को सीज कराने की प्रक्रिया भी चल रही है। मामले में अब तक करीब ₹34 लाख की रकम सीज कराए जाने की बात सामने आई है। जांच में पुलिस को करीब ₹11 करोड़ की ठगी से संबंधित हिसाब मिला है। इस नेटवर्क में लगभग 150 फर्जी अथवा संदिग्ध मोबाइल सिम कार्ड इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी जताई गई है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी 12वीं पास से लेकर स्नातक तक शिक्षित हैं। गिरोह में अलग-अलग सदस्यों की जिम्मेदारियां तय थीं। एक टीम कथित तौर पर म्यूल बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम उपलब्ध कराती थी, जबकि दूसरी टीम खातों में आने वाली रकम निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर करती थी। जांच में अधिकांश मोबाइल सिम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली और बिहार से लिए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ मोबाइल सिम और बैंक खातों का संबंध भोपाल से भी मिला है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य अपनी पहचान और ठिकाना छिपाने के लिए अलग-अलग राज्यों में घूमते रहते थे और निश्चित अंतराल पर स्थान बदल देते थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों, सिम कार्ड उपलब्ध कराने वालों और साइबर ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने वाले नेटवर्क की जांच कर रही है।
