Monday, January 12, 2026
Google search engine
HomeMaharashtraमहानगर पालिका चुनाव में बड़ा फैसला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीजेपी उम्मीदवार का...

महानगर पालिका चुनाव में बड़ा फैसला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीजेपी उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने का आदेश किया निरस्त

मुंबई। राज्य में चल रहे महानगर पालिका चुनावों के बीच एक अहम और मिसाल कायम करने वाले फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को नवी मुंबई के वार्ड 17ए से बीजेपी उम्मीदवार निकेश भोजाने का नामांकन खारिज करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के आदेश को अमान्य करार दिया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भोजाने का नाम वार्ड 17ए के लिए वैध उम्मीदवारों की सूची में जोड़ा जाए। यह राज्य के नगर निकाय चुनावों में इस तरह का पहला आदेश माना जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने पाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने मौजूदा पार्षदों को अयोग्य ठहराने के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों का गलत इस्तेमाल करते हुए भोजाने का नामांकन खारिज किया। अदालत ने 47 वर्षीय वकील भोजाने के नामांकन को अन्यथा पूरी तरह वैध मानते हुए राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) और नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) के चुनावी अधिकारियों को उन्हें आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवार के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि वार्ड 17ए से शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के उम्मीदवार किशोर पाटकर ने भोजाने के नामांकन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 31 दिसंबर, 2025 को रिटर्निंग ऑफिसर ने भोजाने का नामांकन खारिज कर दिया था, जिसे चुनौती देते हुए भोजाने ने इसे अवैध और मनमाना बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। राज्य चुनाव आयोग की ओर से एडवोकेट इरफान शेख ने हलफनामा दाखिल कर दलील दी कि अब भोजाने का नाम जोड़ना संभव नहीं है, क्योंकि उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि 2 जनवरी, 2026 को समाप्त हो चुकी है और उम्मीदवारों की अंतिम सूची 3 जनवरी, 2026 को प्रकाशित होनी थी। हलफनामे में यह भी कहा गया कि संबंधित सीट के लिए ईवीएम की तैयारी शुरू हो चुकी है, इसलिए नामांकन स्वीकार करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। वहीं, शिवसेना उम्मीदवार पाटकर की ओर से वरिष्ठ वकील अनिल सखारे और एनएमएमसी चुनावी अधिकारी की ओर से वकील तेजेश दांडे ने तर्क दिया कि यदि एक वार्ड में चुनाव रोका गया, तो इससे मतदाताओं को दोबारा मतदान के लिए बुलाना पड़ेगा। सखारे ने 31 जनवरी तक पूरे महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव पूरे कराने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए भोजाने की याचिका खारिज करने की मांग की।
इसके विपरीत, वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज सीरवाई ने भोजाने की ओर से जोरदार दलील देते हुए कहा कि नामांकन खारिज करने का आदेश न केवल गैरकानूनी और अमान्य है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है। उन्होंने कहा कि मौजूदा पार्षदों के लिए बनाए गए अयोग्यता प्रावधानों का इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के खिलाफ किया गया, जो कभी पार्षद रहा ही नहीं। हाईकोर्ट ने सीरवाई की दलीलों और वकील निवित श्रीवास्तव के माध्यम से दायर याचिका में उठाए गए बिंदुओं से सहमति जताई। अदालत ने गुरुवार को ही भोजाने को अंतरिम राहत देते हुए मामले को अंतिम सुनवाई के लिए 9 जनवरी तक स्थगित कर दिया था। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसे मामलों में रिट याचिका पर विचार करने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, जहां चुनावी अधिकारियों द्वारा शक्तियों के अवैध और मनमाने इस्तेमाल के स्पष्ट संकेत मिलते हों। नामांकन खारिज करने के आदेश में 24 फरवरी, 2025 को भोजाने को जारी एक सिविक नोटिस का हवाला दिया गया था, जिसमें नवी मुंबई स्थित उनके घर के कथित अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने की बात कही गई थी। इसी आधार पर उन्हें महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के तहत अयोग्य ठहराया गया। हालांकि, याचिका में तर्क दिया गया कि महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम के तहत जारी नोटिस में कथित अनधिकृत इस्तेमाल का कोई स्पष्ट विवरण नहीं था। याचिका में यह भी कहा गया कि धारा 10(1डी), जो अवैध निर्माण या अधिकारियों के काम में बाधा डालने वाले पार्षदों की अयोग्यता से संबंधित है, भोजाने पर लागू ही नहीं होती। याचिका ने नामांकन खारिज किए जाने को “कमजोर और निरर्थक आधारों” पर लिया गया फैसला बताते हुए इसे “लोकतंत्र के लिए अभिशाप” करार दिया और कहा कि चुनाव अब मतपत्रों से नहीं, बल्कि कानून की आड़ में की जा रही अवैध कार्रवाइयों से तय किए जा रहे हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments