
पुणे। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों से पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के गठबंधन की घोषणा के बाद महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसका असर अब पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (पीएमसी-पीसीएमसी) चुनावों पर भी साफ नजर आने लगा है। खासकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के फिर से एक होने की अटकलों ने कांग्रेस को असहज कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने साफ कर दिया है कि यदि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार गुट) का गठबंधन होता है, तो कांग्रेस वहां भी अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुंबई में भी कांग्रेस अब स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरेगी। पत्रकारों से बातचीत में वडेट्टीवार ने कहा- हमने सुना है कि पुणे में एनसीपी के दोनों गुट एक साथ आने की तैयारी में हैं। इस पर हम शरद पवार से बातचीत कर रहे हैं। लेकिन अगर वे साथ आते हैं, तो हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। कांग्रेस पुणे में अकेले नगर निगम चुनाव लड़ेगी। उन्होंने ठाकरे बंधुओं के मिलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मराठी अस्मिता और संस्कृति की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। मुंबई में जमीनें छीनी जा रही हैं और गुजरात का नियंत्रण दिखाई दे रहा है। ऐसे में मराठी पहचान को बचाने की लड़ाई जरूरी है। मैं उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को उनके मिलन के लिए बधाई देता हूं।
हालांकि, वडेट्टीवार ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस मनसे के साथ गठबंधन के लिए तैयार नहीं थी, जबकि बीएमसी चुनाव उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ मिलकर लड़ने की तैयारी थी। इस बीच कांग्रेस की पूर्व मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने भी कहा कि उन्हें ठाकरे बंधुओं के मिलन की जानकारी पहले से थी, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस से इस पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं की। उन्होंने संकेत दिया कि अब कांग्रेस इस गठबंधन के साथ आगे नहीं बढ़ेगी।
एनसीपी में टूट-फूट के नए संकेत
पुणे में एनसीपी के चाचा-भतीजे—शरद पवार और अजीत पवार के संभावित मिलन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय नेताओं का एक वर्ग दोनों के एक होने का समर्थन कर रहा है, लेकिन इसका तीखा विरोध भी सामने आ रहा है। इसी कड़ी में एनसीपी (एसपी) के पुणे शहर अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने बुधवार शाम पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा- मेरे कुछ उसूल हैं। जिस पार्टी के खिलाफ मैंने विधानसभा चुनाव लड़ा, उसी के साथ हाथ मिलाना मेरे लिए गलत है। इससे मेरी छवि और विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा। हमारे कई कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया है और कानूनी मामलों का सामना किया है। ऐसे गठबंधन से उन्हें गलत संदेश जाएगा। जगताप ने यह भी कहा कि बीते 10-20 दिनों से चल रही राजनीतिक अटकलों और अफवाहों ने कार्यकर्ताओं में मानसिक तनाव और अनिश्चितता पैदा कर दी थी।
कांग्रेस में भी असंतोष की आहट
एनसीपी के संभावित एकीकरण और कांग्रेस को साथ लेने की अटकलों के बीच पिंपरी-चिंचवड़ कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश कदम ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा निजी कारणों से है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बदलते समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, बीएमसी चुनावों से शुरू हुई गठबंधन राजनीति अब पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ तक पहुंच चुकी है। जहां एक ओर ठाकरे बंधुओं का मिलन नई धुरी बना रहा है, वहीं एनसीपी के भीतर संभावित एकता कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति किस दिशा में करवट लेती है।



