सूखाग्रस्त किसानों के लिए शरद पवार ने रखीं 17 मांगें, प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख और खेत मजदूरों को ₹25 हजार देने की मांग

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र, तीन दिन का विशेष विधानसभा सत्र बुलाकर दशहरा-दिवाली से पहले आर्थिक मदद देने की मांग

मुंबई। महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण नागरिकों को तत्काल राहत देने के लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार ने रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 17 मांगें रखी हैं। पवार ने किसानों की कर्जमाफी, कृषि पंपों के बिजली बिल माफ करने, प्रति परिवार 25 किलो मुफ्त अनाज, किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख तथा खेत मजदूरों को ₹25 हजार की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इसके साथ ही सूखे की गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए महाराष्ट्र विधानमंडल का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की मांग भी की गई है। महाराष्ट्र सरकार ने कम बारिश के कारण राज्य के 265 तालुकाओं में सूखे की स्थिति घोषित कर राहत उपाय लागू किए हैं। सरकार के फैसले में फसल ऋण के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में रियायत, कृषि संबंधी कर्ज की वसूली स्थगित करने और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत समेत विभिन्न उपाय शामिल हैं। इसी पृष्ठभूमि में शरद पवार ने कहा है कि सूखे की मार झेल रहे किसान, खेत मजदूर, विद्यार्थी और ग्रामीण नागरिकों को अधिक प्रभावी और तत्काल राहत देने के लिए सरकार को अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन मांगों पर तत्काल निर्णय लेने का आग्रह किया है। पवार की पहली मांग है कि मौजूदा सूची में शामिल होने से वंचित रह गए प्रभावित तालुकाओं की स्थिति की जांच कर उन्हें भी सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। दूसरी मांग में सूखाग्रस्त क्षेत्रों का पूरा भूमि राजस्व माफ करने को कहा गया है। तीसरी मांग में किसानों की व्यापक कर्जमाफी की बात कही गई है। पवार ने मांग की है कि पिछली कर्जमाफी के बाद से अब तक किसानों ने खेती और कृषि से जुड़े व्यवसायों के लिए सहकारी बैंकों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, सहकारी अर्बन बैंकों और क्रेडिट सोसायटियों से जो कर्ज लिया है, उसे पूरी तरह माफ किया जाए। इसके साथ सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक और आदिवासी विभाग से लिए गए व्यक्तिगत कर्ज, फल बागानों के लिए लिए गए कर्ज तथा महिला स्वयं सहायता समूहों के कर्ज को भी माफी के दायरे में लाने की मांग की गई है। चौथी मांग में किसानों के कृषि पंपों के सभी बिजली बिल माफ करने को कहा गया है। पांचवीं मांग के तहत सूखाग्रस्त इलाकों के स्कूली और कॉलेज विद्यार्थियों की पूरी शैक्षणिक फीस के साथ छात्रावास और मेस की फीस माफ करने की मांग की गई है।
छठी मांग में रोजगार गारंटी योजना के मौजूदा नियमों को शिथिल कर जहां मांग हो, वहां तीन किलोमीटर के दायरे में तत्काल रोजगार के काम शुरू करने को कहा गया है। सातवीं मांग में पीने के पानी और पशुओं के लिए पानी उपलब्ध कराने हेतु टैंकर मंजूर करने का अधिकार तहसीलदारों को देने की मांग की गई है।
आठवीं मांग के मुताबिक, पानी की कमी से प्रभावित घोषित गांवों में किसानों के कृषि पंपों की बिजली नहीं काटी जाए और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसी प्रकार की लोडशेडिंग न की जाए।
नौवीं मांग में खेती पर निर्भर किसान और खेत मजदूर परिवारों को प्रति परिवार 25 किलो अनाज मुफ्त देने की मांग की गई है। दसवीं मांग के तहत सूखे के कारण संकट में आए किसानों और खेत मजदूरों के पशुधन के लिए आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में जमा करने को कहा गया है। ग्यारहवीं मांग में जल संरक्षण के काम शुरू करने के मौजूदा नियमों में ढील देकर विशेष निधि उपलब्ध कराने और इन कार्यों को तत्काल शुरू करने की मांग की गई है।
बारहवीं और सबसे महत्वपूर्ण मांगों में पवार ने सूखे की गंभीरता को देखते हुए किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख और खेत मजदूरों को ₹25 हजार की आर्थिक सहायता तत्काल उनके बैंक खातों में जमा करने की मांग की है।
तेरहवीं मांग में सूखे के कारण फल बागानों, केले, गन्ने और अन्य फसलों को हुए नुकसान के लिए किसानों को तत्काल आर्थिक मदद देने को कहा गया है। चौदहवीं मांग में बड़े पैमाने पर फल बागान लगाने वाले किसानों की फसल बचाने के लिए सरकार की ओर से टैंकर के जरिए पानी उपलब्ध कराने के तत्काल आदेश जारी करने की मांग की गई है।
पंद्रहवीं मांग में किसान और खेत मजदूरों की व्यक्तिगत लाभ वाली सरकारी योजनाओं के तहत लंबित भुगतान और अनुदान तत्काल जारी करने को कहा गया है। सोलहवीं मांग के तहत सूखा राहत के लिए आवश्यक पूरी राशि विभागीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। सत्रहवीं मांग में शरद पवार ने सूखे की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र विधानमंडल का तीन दिवसीय विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र में सूखे की स्थिति पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक राहत उपायों पर निर्णय लिया जाए और उन फैसलों को तत्काल लागू किया जाए। पवार ने विशेष रूप से मांग की है कि नुकसान झेल रहे किसानों और खेत मजदूरों को दशहरा और दिवाली से पहले आवश्यक आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाए। उन्होंने राज्य सरकार से कहा है कि सूखे की मार झेल रहे किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण नागरिकों की कठिनाइयों को गंभीरता से देखते हुए राहत उपायों को बिना देरी लागू किया जाए। राज्य में सूखे को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से तत्काल नकद सहायता की मांग भी उठाई जा रही है, जबकि सरकार ने फसल नुकसान के आकलन और निर्धारित प्रक्रिया के बाद आर्थिक सहायता देने की बात कही है।

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