
स्वतंत्र लेखक– इंद्र यादव
ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे शहर का वागले इस्टेट, जो न केवल अपने औद्योगिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक उत्साह के लिए भी विशेष स्थान रखता है, इस बार छठ पूजा के रंग में सराबोर रहा। यहाँ की हरियाली, पहाड़ों की गोद में बसा यह इलाका और बरसात की फुहारों ने छठ पर्व को और भी यादगार बना दिया। वागले इस्टेट, जो 1960 के दशक में एक औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित हुआ, आज न केवल उद्योगों का गढ़ है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी बन गया है। इस वर्ष छठ पूजा के अवसर पर नगरसेविका श्रीमती केवलादेवी रामनयन यादव, समाजसेवी श्री महेंद्र सोडारी, श्री जुगेश यादव और श्री जोधन यादव के अथक प्रयासों से वागले इस्टेट में कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया गया। इन तालाबों ने न केवल छठ पूजा के अनुष्ठानों को सुगम बनाया, बल्कि स्थानीय लोगों को एकजुट होकर इस पवित्र पर्व को धूमधाम से मनाने का अवसर भी प्रदान किया। सूर्योपासना का यह महापर्व, जो प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम है, वागले इस्टेट की हरियाली और शांति के बीच और भी मनमोहक लग रहा था। वागले इस्टेट की प्राकृतिक सुंदरता इस उत्सव में चार चाँद लगा रही थी। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ों की तलहटी और बरसात की हल्की फुहारों ने यहाँ के माहौल को और भी रमणीय बना दिया। छठ पूजा के दौरान श्रद्धालु सुबह-शाम तालाबों के किनारे एकत्र हुए, जहाँ उन्होंने सूर्य भगवान को अर्घ्य अर्पित किया और पारंपरिक गीतों के साथ अपनी आस्था को प्रकट किया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस उत्सव में शामिल हुए, और हर चेहरा उत्साह और भक्ति से चमक रहा था।

वागले इस्टेट का यह क्षेत्र, जो अपने औद्योगिक इतिहास के लिए प्रसिद्ध है, आज सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का भी गवाह बन रहा है। यहाँ की जनता ने न केवल छठ पूजा का आनंद लिया, बल्कि प्रकृति के इस अनमोल उपहार—हरियाली, शांति और बारिश—का भी भरपूर लुत्फ उठाया। समाजसेवियों और स्थानीय नेताओं के प्रयासों ने इस पर्व को एक सामुदायिक उत्सव में बदल दिया, जहाँ हर वर्ग के लोग एक साथ आए और अपनी परंपराओं को जीवंत किया। यह छठ पूजा न केवल आस्था का प्रतीक थी, बल्कि वागले इस्टेट की एकता, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक समरसता का भी उत्सव थी। यहाँ की हरियाली और शांत वातावरण में सूर्य भगवान की आराधना ने सभी के मन को आनंद और शांति से भर दिया। वागले इस्टेट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह न केवल उद्योगों का केंद्र है, बल्कि संस्कृति और प्रकृति का भी अनमोल खजाना है।




