महाराष्ट्र में महिला किसानों को मिलेगी आधिकारिक पहचान, 17 अक्टूबर तक चलेगा विशेष अभियान

ग्रामसभा की मंजूरी के बाद 15 दिन में मिलेगा ‘महिला किसान प्रमाणपत्र’; भूमिहीन और पशुपालन, मत्स्यपालन व डेयरी से जुड़ी महिलाएं भी पात्र, बीज-खाद से लेकर कर्ज और फसल बीमा तक की योजनाओं का मिलेगा लाभ

मुंबई। महाराष्ट्र में खेती और कृषि से जुड़े व्यवसायों में सक्रिय महिलाओं को आधिकारिक रूप से ‘किसान’ की पहचान दिलाने के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया गया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पात्र महिला किसानों का पंजीकरण कर उन्हें ‘महिला किसान प्रमाणपत्र’ प्रदान करने की प्रक्रिया चलाई जा रही है। बुधवार को कृषि विभाग के सचिव परिमल सिंह ने मंत्रालय में आयोजित राज्यस्तरीय ऑनलाइन वेबिनार में यह जानकारी दी। वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ के रूप में मनाए जाने की पृष्ठभूमि में ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026’ के तहत यह पहल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य खेती में वास्तविक रूप से काम करने वाली महिलाओं को आधिकारिक पहचान देना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है। वेबिनार में महिला किसान प्रमाणपत्र की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, ग्रामसभा और स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की भूमिका तथा प्रमाणपत्र के आधार पर मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी गई। कृषि सचिव परिमल सिंह ने बताया कि अधिनियम में कृषि की परिभाषा को व्यापक रखा गया है। यदि कोई महिला प्रत्यक्ष रूप से खेती अथवा कृषि से जुड़े सहायक व्यवसाय में कार्यरत है तो उसकी किसान के रूप में पहचान सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। महिला द्वारा आवेदन किए जाने के बाद ग्रामसभा यह सत्यापित करेगी कि संबंधित महिला खेती या कृषि से संबंधित कार्य में सक्रिय है। ग्रामसभा की पुष्टि के बाद 15 दिनों के भीतर महिला किसान प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। आवेदन अस्वीकार होने की स्थिति में संबंधित महिला को इसका कारण लिखित रूप में बताना होगा और उसे 120 दिनों के भीतर अपील करने का अवसर मिलेगा।
बीज, खाद, कर्ज और फसल बीमा में मिलेगा फायदा
महिला किसान प्रमाणपत्र के आधार पर पात्र महिलाएं बीज, खाद, कृषि सामग्री, कृषि उपकरण, कर्ज और फसल बीमा सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगी। इसके अलावा PMFME और CMFME जैसी योजनाओं का लाभ लेने में भी प्रमाणपत्र मददगार होगा। कृषि विभाग ने संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोई भी पात्र महिला किसान इस सुविधा से वंचित न रहे। ग्राम विकास विभाग के सचिव डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार ने बताया कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में ग्राम पंचायत और ग्रामसभा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। महिलाएं ग्रामसेवक अथवा कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के पास आवेदन जमा कर सकेंगी। प्राप्त आवेदनों की सूची ग्रामसभा के सामने रखी जाएगी और चर्चा एवं प्रस्ताव के माध्यम से संबंधित महिला को किसान के रूप में मान्यता देने की प्रक्रिया पूरी होगी। महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्राम पंचायत सदस्यों, सरपंच, उपसरपंच, ग्रामसेवक और खंड विकास अधिकारियों से गांवों में पात्र महिलाओं को प्रमाणपत्र के महत्व और उससे मिलने वाले लाभ की जानकारी देने को कहा गया है। जिला और तालुका स्तर पर पात्र महिलाओं के संबंध में 100 प्रतिशत कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
भूमिहीन महिलाओं को भी मिलेगा प्रमाणपत्र
नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना की परियोजना निदेशक मीनल करणवाल ने बताया कि केवल जमीन अपने नाम रखने वाली महिलाएं ही नहीं, बल्कि भूमिहीन महिला किसान भी इस पहल का लाभ उठा सकेंगी। मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, डेयरी और अन्य कृषि-सहायक व्यवसायों से जुड़ी पात्र महिलाओं को भी प्रमाणपत्र प्रदान किया जा सकेगा। प्रमाणपत्र मिलने से नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना के DBT के तहत 22 घटकों के साथ कृषि उपकरण बैंक और एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट जैसी योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा। परियोजना के अंतर्गत आने वाले 7,201 गांवों में पात्र महिला किसानों को प्रमाणपत्र दिलाने के लिए सक्रिय अभियान चलाने का आह्वान किया गया है। महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘उमेद’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीधर डुबे पाटील ने ‘उमेद’ से जुड़ी पात्र महिलाओं से भी आवेदन करने की अपील की। ग्रामसखी, कृषिसखी, पशुसखी, CRP और कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया को गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे कृषि योजनाओं और अनुदानों तक महिलाओं की पहुंच आसान होने के साथ आर्थिक सशक्तिकरण और ‘लखपति दीदी’ के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा। वेबिनार में कृषिताई, कृषिसखी, ‘उमेद’ अभियान के प्रतिनिधि, ग्रामसेवक, सरपंच, खंड विकास अधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और पात्र महिला किसान ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुईं। कृषि विभाग ने राज्य की सभी पात्र महिला किसानों से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में भाग लेकर महिला किसान प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की अपील की है।

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