
मुंबई। महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्ल्यूसीडी) ने राज्य के बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में रहने वाले संकटग्रस्त और कानूनी रूप से विकलांग बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ और परामर्श उपलब्ध कराने के लिए एमपावर संस्था के माध्यम से ‘मासूम’ परियोजना का सफल क्रियान्वयन किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संवेदनशील निर्णय के परिणामस्वरूप अब तक 3,337 बच्चे इस पहल से लाभान्वित हो चुके हैं और 9,593 से अधिक व्यक्तिगत परामर्श सत्र आयोजित किए गए हैं। इस परियोजना का संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अंतर्गत किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग और आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट की पहल, एमपावर, के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत यह योजना मुंबई, पुणे, ठाणे, नागपुर और नासिक में सक्रिय है। कुल 19 बाल देखभाल संस्थानों को पाँच मनोवैज्ञानिकों की टीम द्वारा सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। मनोवैज्ञानिक इन संस्थानों का नियमित दौरा करते हैं, बच्चों की मानसिक स्थिति का आकलन करते हैं और आवश्यकतानुसार चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करते हैं। इस दौरान तनाव पैमाना, आक्रामकता पैमाना, राज्य लक्षण चिंता परीक्षण और मनोवैज्ञानिक कल्याण पैमाना जैसे वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग किया जाता है। गंभीर मामलों में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) को भी विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
बच्चों के परिवारों को भी परामर्श प्रदान किया जाता है ताकि उनके घर लौटने के बाद उन्हें एक सुरक्षित और सहयोगी वातावरण मिल सके। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के पुनर्वास को प्रभावी बनाना और समाज में उनके पुनः एकीकरण को सुनिश्चित करना है। एमपावर और आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट की संस्थापक एवं अध्यक्ष नीरजा बिड़ला ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह निर्णय राज्य में बाल मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाले दूरदर्शी नेतृत्व का उदाहरण है। एमपावर का लक्ष्य संकट और संघर्ष में फंसे बच्चों को तत्काल आघात से राहत देने और प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों की मदद से एक स्थायी, सुरक्षित और सहायक वातावरण उपलब्ध कराना है। यह पहल न केवल बच्चों के वर्तमान मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि भविष्य में उनके आत्मनिर्भर और स्वस्थ जीवन के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार कर रही है।