‘नो बैग डे’ पर किताबों से बाहर निकली पढ़ाई, बच्चों ने फिल्म से सीखे जीवन-मूल्य और क्यारियों में बोए बीज

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। अनुकूल मौसम और खुशनुमा वातावरण के बीच उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर गढ़ौवा में आयोजित ‘नो बैग डे’ विद्यार्थियों के लिए पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर अनुभव, चिंतन और जीवन-कौशल सीखने का अवसर बन गया। बच्चों ने जहां ‘हनुमान अंश’ फिल्म के माध्यम से बाबा नीब करौली के जीवन-वृत्त और उससे जुड़े प्रेरक जीवन-मूल्यों को समझा, वहीं ‘लर्निंग बाय डूइंग’ (LBD) के तहत पोषण वाटिका में स्वयं बीज बोकर जैविक खेती की व्यावहारिक जानकारी हासिल की। विद्यार्थियों की अधिक संख्या को देखते हुए ‘हनुमान अंश’ फिल्म का प्रदर्शन दो चरणों में किया गया। फिल्म के माध्यम से बच्चों को सेवा, सरलता, अनुशासन, मानवीय संवेदना और सकारात्मक सोच जैसे जीवन-मूल्यों पर विचार करने का अवसर मिला। फिल्म देखने के बाद विद्यार्थियों ने अपने अनुभव भी साझा किए। इससे गतिविधि महज मनोरंजन तक सीमित न रहकर बच्चों के लिए चिंतन और सीख का माध्यम बनी। इसके बाद विद्यालय परिसर में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ के तहत पोषण वाटिका की गतिविधियां आयोजित की गईं। शिक्षक प्रदीप कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों को छोटी-छोटी क्यारियां सौंपकर उनमें लगे पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी दी। शिक्षिका रमनजीत कौर के मार्गदर्शन में प्रियंका, राजकुमार, सूरज, आशीष, आयुष, रोहित, ईशान और माही सहित विद्यार्थियों ने भिंडी, करेला, धनिया, चुकंदर और गाजर के बीज बोए। इस दौरान बच्चों को मिट्टी तैयार करने, बीज लगाने, जैविक खेती और पौधों की प्राकृतिक तरीके से देखभाल करने के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई। विद्यालय की पोषण वाटिका में पहले से लौकी, कद्दू और तोरई सहित विभिन्न पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की देखभाल के लिए शिक्षक इंद्रपाल द्वारा निजी खर्च से नियुक्त माली ने आवश्यक दवा का छिड़काव किया। प्रधानाध्यापिका शशि देवी की मौजूदगी में आयोजित गतिविधियों के माध्यम से ‘नो बैग डे’ को ‘देखो, समझो, करो और जिम्मेदारी निभाओ’ की अवधारणा से जोड़ने का प्रयास किया गया। विद्यालय में सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न इस आयोजन के जरिए बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली, सामाजिकता, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता जैसे जीवन-मूल्यों से व्यावहारिक रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया। किताब और कॉपी से अलग गतिविधियों में बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने ‘नो बैग डे’ को उनके लिए सीखने का एक अलग अनुभव बना दिया।
