
मुंबई। मुंबईकरों के अपने हक का घर पाने के सपने को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गुरुवार को आयोजित चाबी वितरण समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह अवसर सरकार की कार्यशैली और संकल्प पर मुहर लगाता है। उन्होंने बताया कि पुनर्विकास के माध्यम से बीडीडी चॉल के निवासियों को 556 फ्लैटों का वितरण इस दिशा में शुरुआत है। महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) द्वारा आयोजित इस समारोह का आयोजन माटुंगा स्थित यशवंत नाट्य मंदिर में किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, विधान परिषद की उपाध्यक्ष डॉ. नीलम गोरहे, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार, राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर, सांसद मिलिंद देवड़ा, विधायक सुनील शिंदे, कालिदास कोलंबकर, सचिन अहीर, महेश सावंत, पूर्व विधायक सदा सरवणकर, किरण पावस्कर समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मंच पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना बीते 20-25 वर्षों से विभिन्न कारणों से अटकी हुई थी। सरकार ने बिना किसी डेवलपर को नियुक्त किए सीधे म्हाडा के माध्यम से इस परियोजना को लागू करने का निर्णय लिया। वैश्विक निविदाओं के जरिए कार्य प्रारंभ हुआ, जिसमें स्थान का सर्वोत्तम उपयोग, सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की गईं। भूमिपूजन के बाद भी कई अड़चनें आईं, लेकिन सभी पक्षों के सहयोग से उनका समाधान किया गया। अब पहले चरण में 556 परिवारों को घर मिल रहे हैं, दूसरा चरण अक्टूबर-नवंबर में और तीसरा चरण दिसंबर में पूरा होगा, जिसके बाद वर्ली की सभी बीडीडी चॉल के निवासियों को घर मिल जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिसकर्मियों के लिए घर की कीमत 50 लाख रुपये से घटाकर मात्र 15 लाख रुपये कर दी गई है, ताकि उन्हें भी किफायती आवास मिल सके। अभ्युदय नगर और जीटीबी नगर जैसी पुरानी कॉलोनियों का पुनर्विकास भी जारी है। धारावी पुनर्विकास परियोजना को भी तेज किया गया है, जहां 10 लाख से अधिक लोगों को घर दिया जाएगा। वहां के व्यवसायों को पांच वर्षों तक कर में छूट दी जाएगी और धारावी को औद्योगिक क्षेत्र में विकसित कर रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीडीडी चॉल का इतिहास केवल इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुंबई के सामाजिक और आर्थिक बदलाव का जीवंत प्रतीक है। यहां की दीवारों ने कई पीढ़ियों के सुख-दुख और संघर्ष देखे हैं। मुख्यमंत्री ने निवासियों से अपील की कि ये घर आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘सोने’ जैसे निवेश हैं, इसलिए इन्हें बेचना नहीं चाहिए। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि बीडीडी चॉल के पुनर्विकास में केवल घर नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता, आधुनिक सुविधाएं और स्थायित्व को प्राथमिकता दी गई है। निवासियों के घरों में वही गुणवत्ता रखी गई है जो बिक्री योग्य घटक में होती है। निर्माण में बेहतरीन सामग्री और तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे इमारतें 100 वर्षों तक टिकाऊ रहें और 12 वर्षों तक रखरखाव मुक्त रहें। परियोजना में खुले स्थान, उद्यान, मैदान, क्लब हाउस जैसी सुविधाओं के साथ ‘वॉक टू वर्क’ की अवधारणा को साकार किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फ्लैटों के स्वामित्व में महिलाओं को प्राथमिकता देने के प्रावधान किए जाएं। अंत में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मेट्रो नेटवर्क, अटल सेतु, गड्ढा मुक्त सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी लाकर मुंबई के विकास को नई दिशा दी है।




