
मुंबई। मुंबई के माहिम इलाके में स्थित हजरत मखदूम अली माहिमी की दरगाह पर सालाना उर्स मेला सोमवार, 16 दिसंबर से शुरू हो गया है। इस 10 दिवसीय मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
पुलिस ने चढ़ाई पहली चादर
पुलिसकर्मियों ने पारंपरिक परिधानों में माहिम पुलिस स्टेशन से दरगाह तक एक संदल (जुलूस) निकाला और दरगाह पर पहली चादर चढ़ाई। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर विनायक वेताल ने बताया, हमने माहिम दरगाह पर सलामी दी और पहली चादर चढ़ाई। यह परंपरा हर साल निभाई जाती है। पुलिस ने इस साल उर्स की तैयारियां तीन महीने पहले शुरू कर दी थीं। दरगाह पर 10 दिनों तक चलने वाले इस मेले के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। आयोजन में स्थानीय पुलिस, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट का सहयोग है।
उर्स की ऐतिहासिक प्रथा
इस उर्स मेले की परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है। लोग धर्म और जाति के भेदभाव को भूलकर इसमें शामिल होते हैं। कॉन्स्टेबल प्रवीण चिपकर, जो 45 वर्षों से इस जुलूस का हिस्सा रहे हैं, ने बताया कि वे हर साल, चाहे जहां भी हों, इस जुलूस में भाग लेने के लिए माहिम जरूर पहुंचते हैं। माहिम दरगाह के मैनेजिंग ट्रस्टी सोहेल खंडवानी ने बताया, यह हजरत मखदूम अली माहिमी की 611वीं पुण्यतिथि है। अगले 10 दिनों में करीब 400-450 संदल और 7 लाख से अधिक श्रद्धालु दरगाह पर आने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि दरगाह का साल 1901 का गजट उनके पास मौजूद है, जो इस आयोजन की पुरानी और समृद्ध परंपरा का प्रमाण है। इस 10 दिवसीय मेले में श्रद्धालु दरगाह पर चादर चढ़ाकर मखदूम अली माहिमी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इसके साथ ही, विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का आयोजन भी होता है, जिससे यह मेला न केवल एक धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक समागम का प्रतीक बन जाता है।




