
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 7 जनवरी 2026 को मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की 2023 की जातीय हिंसा में कथित भूमिका से जुड़े पूरे 48 मिनट के ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच का आदेश दिया है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए, जो ‘कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट’ (KOHUR) ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि ऑडियो पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है और पूरी बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट भी याचिका में शामिल है, जबकि राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पूरी रिकॉर्डिंग उन्हें पिछली सुनवाई के बाद ही मिली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आदेश दिया कि संबंधित पूरे 48 मिनट के ऑडियो, पूर्व मुख्यमंत्री की प्रमाणित वॉयस सैंपल रिकॉर्डिंग और याचिकाकर्ता द्वारा सौंपे गए सभी वॉयस क्लिप्स को नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफ़एसयू), गांधीनगर भेजा जाए। कोर्ट ने एनएफ़एसयू को जांच प्रक्रिया में तेजी लाने और अपनी अंतिम रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करने के निर्देश भी दिए। इससे पहले 15 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब पूरी टेप उपलब्ध थी तो केवल सीमित हिस्से को ही फॉरेंसिक जांच के लिए क्यों भेजा गया। अदालत कोहुर (कुकी मानवाधिकार संगठन ट्रस्ट) की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें इस मामले की स्वतंत्र एसआईटी जांच की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि 3 नवंबर को एनएफ़एसयू ने अपनी प्रारंभिक राय में कहा था कि लीक हुए ऑडियो क्लिप्स के साथ छेड़छाड़ की गई है। इसी पृष्ठभूमि में, राज्य भाजपा के भीतर असंतोष और नेतृत्व परिवर्तन की मांगों के बीच एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।



