Tuesday, March 24, 2026
Google search engine
HomeCrimeसाढ़े तीन साल के मासूम आरव खरात की मौत का जिम्मेदार कौन?

साढ़े तीन साल के मासूम आरव खरात की मौत का जिम्मेदार कौन?

दिवा में लापरवाही की भेंट चढ़ा मासूम, कृत्रिम गड्ढे में डूबने से मौत; हादसे के बाद जागा प्रशासन

ठाणे। ठाणे जिले के दिवा इलाके से शनिवार शाम को एक बेहद दर्दनाक और संवेदनहीनता को उजागर करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ बिल्डरों और ठेकेदारों की कथित लापरवाही के चलते साढ़े तीन साल के मासूम आरव खरात की पानी से भरे एक बड़े कृत्रिम गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। इस हृदयविदारक हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय नागरिकों के तीव्र विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आया और ठाणे महानगर पालिका (टीएमसी) ने 48 घंटे के भीतर जेसीबी की मदद से उस जानलेवा गड्ढे को भर दिया। मासूम को खोने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आरव की माँ ने रोते-बिलखते हुए प्रशासन और समाज से भावुक अपील की—“मेरे बच्चे की जान तो चली गई, लेकिन अब किसी और बच्चे के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। शहर में जहाँ भी ऐसे खुले गड्ढे हों, उन्हें तुरंत भरवाया जाए, ताकि किसी और घर का चिराग न बुझे। घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और परिजनों में भारी आक्रोश देखा गया। समाजसेवक अमोल केंद्रे ने बिल्डरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार निर्माण कार्य के बाद बड़े-बड़े गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जो जानलेवा साबित होते हैं। उन्होंने मांग की कि “अगर यह गड्ढा समय पर भर दिया गया होता, तो आज आरव ज़िंदा होता। इस मामले में जिम्मेदारों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। हादसे के बाद परिवार ने समाजसेवक अमोल केंद्रे और पत्रकार दिनेश रावल, नागेश पवार तथा अरविंद कोठारी से संपर्क किया। इसके बाद टीम ने दिवा प्रभाग समिति के अधिकारियों को सूचना दी, जिसके पश्चात ठाणे महानगर पालिका के अधिकारी मौके पर पहुंचे और तत्काल कार्रवाई करते हुए गड्ढे को मिट्टी से भर दिया। हालांकि स्थानीय लोगों ने गड्ढा भरने के लिए प्रशासन का आभार व्यक्त किया, लेकिन साथ ही एक बड़ा सवाल भी उठाया—क्या प्रशासन और बिल्डरों को अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए हमेशा किसी मासूम की जान जाने का इंतजार करना पड़ता है? यह घटना सिर्फ दिवा या ठाणे तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन निर्माण स्थलों की नियमित निगरानी करे और खुले छोड़े गए गड्ढों के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों व बिल्डरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments