
मुंबई। मुंबई उपनगर के साकी नाका मेट्रो स्टेशन के पास मंगलवार को सामने आए कुछ चिंताजनक वीडियो ने नागरिक सुविधाओं और जन स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल दृश्यों में गाड़ियां कूड़े से भरे गंदे पानी के बीच से गुजरती नजर आ रही हैं, जबकि कुछ वाहन इसी दूषित पानी में खड़े दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (formerly Twitter) पर ‘Mumbai Matters’ नाम के अकाउंट द्वारा साझा की गई तस्वीरों में असल्फा लिंक रोड का एक हिस्सा गहरे, प्रदूषित पानी में डूबा हुआ दिख रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यह पानी पास के नाले या सीवेज सिस्टम के ओवरफ्लो होने के कारण जमा हुआ। पानी में तैरता कूड़ा और मलबा साफ तौर पर नजर आ रहा है, जिससे इलाके में अस्वच्छ और खतरनाक स्थिति बन गई है। यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त ट्रांज़िट पॉइंट्स में से एक के बेहद करीब है, जहां रोज़ाना बड़ी संख्या में यात्री और पैदल चलने वाले लोग गुजरते हैं। ऐसे में इस तरह का जलभराव न केवल आवाजाही में बाधा बन रहा है, बल्कि जल-जनित बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा रहा है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक यूज़र ने लिखा कि कुछ साल पहले तक यहां जलभराव की समस्या नहीं होती थी और अब हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। वहीं, एक अन्य यूज़र ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास होने के बावजूद इलाके की बदहाल बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाए। इन आलोचनाओं के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी है। साझा की गई तस्वीर में एक जेसीबी मशीन को सीवेज सिस्टम की सफाई करते हुए दिखाया गया है। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर मुंबई के कई निचले और व्यस्त इलाकों में खराब ड्रेनेज सिस्टम की समस्या को उजागर कर दिया है। सीवेज ओवरफ्लो और जलभराव जैसी स्थितियां न केवल रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा करती हैं। यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के बीच बढ़ती ‘आदत बन चुकी सहनशीलता’ को भी दर्शाता है, जहां लोग ऐसी परिस्थितियों को सामान्य मानकर बिना विरोध के स्वीकार कर लेते हैं। मुंबई जैसे महानगर के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, नियमित रखरखाव और सख्त निगरानी की तत्काल आवश्यकता है। साथ ही, नागरिकों को भी ऐसे मुद्दों पर जागरूक होकर सक्रिय रूप से शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि इन्हें नजरअंदाज न किया जा सके और समय रहते समाधान सुनिश्चित हो।




