Thursday, April 2, 2026
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वसई का ऋषिकेश वैद्य: “मैं शिव हूं और तुम मेरी पार्वती”, अध्यात्म की आड़ में महिला से बलात्कार!

भक्ति के बाज़ार में ‘नरभक्षी’ बाबा: वसई के पाखंडी ऋषिकेश वैद्य का महापाप!

इंद्र यादव/ वसई/पुणे। महादेव के नाम पर लूटी अस्मत, अश्लील तस्वीरों से बुना ब्लैकमेलिंग का नर्क!धिक्कार है ऐसे ‘धर्मगुरु’ पर! वसई की गलियों में ‘आमची वसई’ का झंडा बुलंद करने वाला तथाकथित मसीहा और स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु ऋषिकेश वैद्य असल में एक भेड़िया निकला, जिसने धर्म की आड़ में एक महिला की जिंदगी को जीते-जी नर्क बना दिया। श्रद्धा की चादर ओढ़कर यह दरिंदा फेसबुक के जरिए शिकार ढूंढता था और अध्यात्म का चोला पहनकर उनकी रूह तक को छलनी कर देता था।शिव-पार्वती के पवित्र रिश्ते को किया कलंकितइस हैवान की हिम्मत तो देखिए! दिसंबर 2023 में पुणे के मांजरी इलाके के एक लॉज में इसने अपराध की सारी हदें पार कर दीं। पीड़ित महिला को नशीला पदार्थ पिलाकर उसे सुध-बुध खोने पर मजबूर किया और फिर अपनी हवस मिटाने के लिए उसने जो शब्द कहे, वो किसी भी आस्तिक का खून खौला देंगे। उसने कहा— “मैं साक्षात शिव (शंकर) हूं और तुम मेरी पार्वती हो।” सोचिए उस महिला की मानसिक स्थिति क्या रही होगी, जिसे धर्म का वास्ता देकर, नशे की हालत में एक दरिंदे ने अपनी हवस का शिकार बनाया। यह सिर्फ बलात्कार नहीं है, यह करोड़ों लोगों की आस्था पर किया गया सबसे गंदा प्रहार है! कैमरे के पीछे का ‘शैतान’: तस्वीरों से किया रूह का सौदाऋषिकेश वैद्य सिर्फ बलात्कारी नहीं, बल्कि एक शातिर अपराधी भी है। उसने पीड़िता की बेहोशी का फायदा उठाकर उसकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो बना लिए। पवित्र मंत्रों का जाप करने वाला यह पाखंडी उन तस्वीरों के दम पर पिछले डेढ़ साल से महिला का मानसिक और शारीरिक शोषण कर रहा था। मई 2025 में जब उसने फिर से वसई के एक होटल में महिला को बुलाकर जबरदस्ती करने की कोशिश की, तब जाकर इस ‘सफेदपोश शैतान’ का काला चिट्ठा खुला। ब्लैकमेलिंग का यह खेल इतना खौफनाक था कि पीड़िता तिल-तिल कर मर रही थी, लेकिन आरोपी की भूख कम नहीं हो रही थी। माणिकपुर पुलिस (वसई) ने इस मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला हडपसर पुलिस (पुणे) को ट्रांसफर कर दिया है। अब खाकी का हंटर इस पाखंडी की कमर तोड़ेगा। समाज अब यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब तक ये ‘स्वयंभू भगवान’ मासूमों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे! ऋषिकेश वैद्य जैसे लोग हमारे समाज के लिए कैंसर हैं। जो ‘आमची वसई’ (हमारी वसई) का नारा बुलंद करता था, उसने उसी वसई का नाम मिट्टी में मिला दिया है। अब वक्त है इस पाखंडी के चेहरे से अध्यात्म का नकाब उतारकर उसे सलाखों के पीछे सड़ाने का! जनता की अदालत में सवाल: क्या ऐसे दरिंदों को समाज में रहने का हक है? जो ‘शिव’ बनकर ‘पार्वती’ का शिकार करे, उसे कानून की सबसे कठोर सजा मिलनी ही चाहिए!

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