
मुंबई। सर जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिजाइन में दिव्यांग कलाकारों के लिए आयोजित विशेष कला कार्यशाला इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। 6 से 8 अप्रैल 2026 तक चलने वाली इस कार्यशाला में रंगों के माध्यम से कलाकारों ने अपने सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास को जीवंत रूप दिया। इस कार्यशाला का आयोजन IASOWA और राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांग सशक्तिकरण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है, जिसमें मुंबई और आसपास की 18 से अधिक संस्थाओं के 42 दिव्यांग कलाकारों ने भाग लिया। इस पहल के पीछे IASOWA की अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कार्यशाला की खास बात यह रही कि इसमें ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम, बौद्धिक दिव्यांगता, श्रवण बाधा, कम दृष्टि और पैराप्लेजिया जैसी विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे कलाकारों ने अपनी सृजनात्मकता का शानदार प्रदर्शन किया। हर चित्र में उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और खुद को साबित करने की इच्छा साफ दिखाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि कला दिव्यांग बच्चों के लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी पहचान बनाने का सशक्त जरिया है। जहां शब्द कम पड़ जाते हैं, वहां रंग उनकी भावनाओं को बखूबी व्यक्त करते हैं। इस कार्यशाला का उद्देश्य कलाकारों को सृजनात्मक प्रशिक्षण, कौशल विकास, आत्मविश्वास बढ़ाने के अवसर और कला क्षेत्र में करियर की दिशा से परिचित कराना है। कार्यशाला का समापन 8 अप्रैल को चित्र प्रदर्शनी के साथ होगा, जिसका उद्घाटन दोपहर 3 बजे मुख्य सभागार में किया जाएगा। यह प्रदर्शनी 8 से 10 अप्रैल तक आम जनता के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहेगी। दिव्यांग कलाकारों ने अपनी कला से यह साबित कर दिया कि सीमाएं केवल शरीर तक सीमित होती हैं, जबकि सपनों और सृजनात्मकता की कोई सीमा नहीं होती।




