Saturday, March 14, 2026
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‘उड़ान’ मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से नागपुर जिले को मिली उल्लेखनीय सफलता, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँची सेवाएं

नागपुर। नागपुर जिले में लागू जिला स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘उड़ान’ ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा टाटा ट्रस्ट्स के सहयोग से 2018 में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराना, जन-जागरूकता बढ़ाना, अस्पतालों के बाहर उपचार को बढ़ावा देना, और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या में वृद्धि करना है। वर्ष 2023 से यह परियोजना ग्रामीण आदिवासी विकास सेवा संस्था के माध्यम से संचालित की जा रही है, और इंदिरा फाउंडेशन इसका समर्थन कर रही है। ‘उड़ान’ कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के 13 तालुकों में 2 उप-जिला अस्पताल, 10 ग्रामीण अस्पताल, 56 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 778 ग्राम पंचायतें और 1724 आशा कार्यकर्ता शामिल किए गए हैं। इन आशा कार्यकर्ताओं की मदद से टैब के माध्यम से घर-घर जाकर मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया गया, जिसमें अब तक कुल 6,22,431 नागरिकों की स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है। इसके अलावा, इस योजना के तहत 9110 मानसिक स्वास्थ्य बाह्यरोगी सत्र (OPD) आयोजित किए गए, जिनमें 9472 मरीजों को उपचार मिला और कुल 92,423 परामर्श और सेवाएं प्रदान की गईं। इनमें से 66% मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, जबकि 24% का इलाज जारी है। ‘उड़ान’ टीम ने 11,936 मरीजों के घर जाकर परामर्श सत्र भी आयोजित किए हैं। इस परियोजना से पहले ग्रामीण नागरिकों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नागपुर शहर आना पड़ता था, लेकिन अब ये सेवाएं निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही उपलब्ध हैं। जिले के 69 सेवा केंद्रों में से 13 केंद्रों पर जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम और 56 केंद्रों पर प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। ग्राम पंचायतों, महिला स्वयं सहायता समूहों, भजन मंडलों और किसान समूहों की मदद से जिले के 465 गांवों में मासिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही, 1724 आशा कार्यकर्ताओं को मानसिक स्वास्थ्य और जन-जागरूकता के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “नागपुर जिले ने ‘उड़ान’ के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है और यह पहल देश के अन्य जिलों के लिए आदर्श बन सकती है।” इस कार्यक्रम की सफलता में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, जिला परिषद, ग्रामीण और उप-जिला अस्पतालों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का भी अहम योगदान रहा है।

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