
पीईटी बोतलों के संग्रह और रिसाइक्लिंग के लिए पर्यावरण विभाग और हिंदुस्तान कोका-कोला के बीच देश का पहला हुआ एमओयू
मुंबई। जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने और सर्कुलर इकॉनमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को महाराष्ट्र शासन के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा राज्य जलवायु कार्यवाही कक्ष (स्टेट क्लाइमेट एक्शन सेल) ने मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कार्यक्रम राज्य की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे की प्रमुख उपस्थिति में आयोजित किया गया। राज्य जलवायु कार्यवाही कक्ष ने क्लाइमेट ट्रेड एलएलपी के साथ, जबकि पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेज कंपनी के साथ “महा-आरईपीटी अभियान” चलाने के लिए समझौता (एमओयू) किया है। देश में पहली बार, कोका-कोला कंपनी ने पीईटी बोतलों के कलेक्शन (संग्रह) और रिसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) के लिए राज्य सरकार के साथ एमओयू किया है। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव जयश्री भोज तथा जलवायु परिवर्तन कक्ष के निदेशक अभिजीत घोरपड़े ने इन एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस्तेमाल की गई पीईटी बोतलों के कलेक्शन (संग्रह) और रिसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) करने के लिए हिंदुस्तान कोका-कोला कंपनी (एचसीसीबी) और महाराष्ट्र सरकार के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने “महा-आरपीईटी अभियान” शुरू करने के लिए हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेज कंपनी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। इस उपक्रम से पूरे राज्य में इस्तेमाल की हुई पीईटी बोतलों को इकट्ठा करने और रिसाइक्लिंग करने को बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने कहा है कि यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) को ज़्यादा सस्टेनेबल (टिकाऊ) बनाने यह प्रयास राज्य की पर्यावरण संरक्षण के प्रति दीर्घकालीन दृष्टि को दर्शाता है। ये दोनों एमओयू क्लाइमेट रेजिलिएंस (जलवायु प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने, इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी (संस्थागत क्षमता) को मज़बूत करने और सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) को बढ़ावा देने में मदद करेंगे। ऐसा पहली बार है कि जब महाराष्ट्र सरकार के पर्यावरण विभाग ने किसी बड़ी एफएमसीजी कंपनी के साथ समुदाय-केंद्रित और संरचित पीईटी संग्रह एवं जनजागरूकता कार्यक्रम के लिए साझेदारी की है। इस कोलेबोरेशन के तहत मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल, पुणे, नाशिक, छत्रपती संभाजीनगर, बीड और पालघर में जनजागरूकता अभियान, स्ट्रक्चर्ड कलेक्शन अरेंजमेंट और ज़िम्मेदारी से डिस्पोज़ल की जानकारी और एजुकेशनल मटीरियल का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। खुदरा दुकानों (रिटेल आउटलेट), होटलों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर कलेक्शन (संग्रह) की सुविधाएं स्थापित की जाएंगी तथा स्कूलों, संस्थाओं और स्थानीय स्वराज्य निकायों (लोकल बॉडी) के साथ वर्षभर समन्वय बनाए रखा जाएगा। इस एमओयू से नीतिगत निगरानी और प्रत्यक्ष क्रियान्वयन के बीच समन्वय स्थापित करते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक व्यावहारिक मॉडल विकसित होगा। प्रमुख शहरों में पीईटी कचरा प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और समुदाय-केंद्रित बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपक्रम माना जा रहा है। राज्य जलवायु कार्यवाही कक्ष और क्लाइमेट ट्रेड एलएलपी के बीच हुए एमओयू से जलवायु संबंधी जनजागरूकता, भागिधारकों (स्टेकहोल्डर) की भागीदारी और क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) को बल दिया जाएगा। इस कोलेबोरेशन से महाराष्ट्र की राज्य जलवायु कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन, संवाद प्रणाली और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे स्टेट क्लाइमेट एक्शन सेल की दो रिपोर्ट का किया विमोचन
पंकजा मुंडे के हाथों दो महत्वपूर्ण रिपोर्टों का भी विमोचन किया गया। सी ४० सिटीज के सहयोग से तैयार “सी40 रिपोर्ट: महाराष्ट्र के शहरों में ऊर्जा और भवन क्षेत्र का नेट-ज़ीरो संक्रमण” में राज्य के शहरों के लिए नेट-ज़ीरो और जलवायु-प्रतिरोधी विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। मुंबई, अमरावती और ठाणे सहित सात शहरों ने उच्च प्रभाव वाली कार्ययोजनाएं तैयार की हैं, जिनमें महानगरपालिका इमारतों को नेट-ज़ीरो बनाना और रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना शामिल है। इसके साथ स्टेट क्लाइमेट एक्शन सेल ने भी मुंबई क्लाइमेट वीक के दौरान दो ज़रूरी रिपोर्ट जारी कीं। C40 रिपोर्ट: महाराष्ट्र के शहरों में एनर्जी और बिल्डिंग्स में नेट ज़ीरो ट्रांज़िशन, जिसे C40 सिटीज़ के साथ मिलकर तैयार किया गया है, महाराष्ट्र के शहरों के लिए नेट-ज़ीरो और क्लाइमेट-रेज़िलिएंट डेवलपमेंट का रोडमैप पेश करती है। मुंबई, अमरावती और ठाणे समेत सात शहरों ने हाई-इम्पैक्ट एक्शन प्लान तैयार किए हैं, जो म्युनिसिपल बिल्डिंग्स को नेट-ज़ीरो बनाने और रूफटॉप सोलर पावर बढ़ाने पर फोकस करते हैं। इसके अलावा सेंटर फॉर वॉटर एंड सैनिटेशन (सीडब्लूएएस) के साथ मिलकर तैयार की गई “सीडब्ल्यूएएस रिपोर्ट: जलवायु-उत्तरदायी वॉश सेवा” मार्गदर्शिका में जलवायु परिवर्तन के अनुरूप जल एवं स्वच्छता सेवाएं कैसे लागू की जाएं, इस पर प्रैक्टिकल गाइडेंस (व्यावहारिक मार्गदर्शन) दिया गया है। इसमें सर्कुलर इकॉनमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था), एनर्जी ट्रांज़िशन (ऊर्जा संक्रमण) और इनक्लूसिवनेस (समावेशिता) पर विशेष बल दिया गया है। इन उपक्रमों से शहर-केंद्रित जलवायु कार्रवाई में महाराष्ट्र अग्रणी भूमिका निभाएगा और अन्य शहरों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करेगा।




