
नवी मुंबई। नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एनएमएमसी) द्वारा न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी) के अंतर्गत सिस्टमैटिक स्क्रीनिंग शुरू किए जाने के बाद तुर्भे स्थित रामतनु माता चाइल्ड हॉस्पिटल में दो बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। एनएमएमसी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 12 नवंबर 2024 को एनआरसी शुरू होने के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान इन बच्चों की पहचान हुई। प्रारंभिक स्क्रीनिंग में गंभीर कुपोषण के संकेत मिलने पर दोनों बच्चों को विस्तृत चिकित्सीय जांच के लिए भर्ती किया गया। जांच के बाद एक बच्चे में गंभीर तीव्र कुपोषण (सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रिशन– SAM) और दूसरे में मध्यम तीव्र कुपोषण (मॉडरेट एक्यूट मालन्यूट्रिशन– MAM) की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों बच्चों का समय पर इलाज शुरू कर दिया गया है और उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल व थेराप्यूटिक पोषण दिया जा रहा है। फिलहाल दोनों बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है। एनएमएमसी द्वारा स्थापित न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर का उद्देश्य कुपोषण से प्रभावित बच्चों की पहचान, उपचार और पुनर्वास करना है। इस केंद्र के माध्यम से जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती, पोषण प्रबंधन और नियमित फॉलो-अप की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। तुर्भे के अलावा एनएमएमसी स्वास्थ्य विभाग ने वाशी, नेरुल और ऐरोली के सरकारी अस्पतालों में भी एनआरसी सेवाओं का विस्तार किया है। अब तक इन केंद्रों में गंभीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित 128 बच्चों और मध्यम तीव्र कुपोषण से ग्रस्त 713 बच्चों का इलाज किया जा चुका है। उपचार के तहत रेडी-टू-यूज़ थेराप्यूटिक फूड और अन्य निर्धारित पौष्टिक आहार दिए जा रहे हैं। सामुदायिक स्तर पर कुपोषण की शुरुआती पहचान को मजबूत करने के लिए पिछले एक वर्ष में 18 पोषण एवं स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया है। इन शिविरों में संदिग्ध पाए गए बच्चों को पुष्टि और आगे के इलाज के लिए नगर निगम के अस्पतालों में रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य यही है कि नवी मुंबई का कोई भी बच्चा कुपोषण से पीड़ित न रहे। इसके लिए निरंतर स्क्रीनिंग, समय पर इलाज और नियमित फॉलो-अप को बेहद अहम माना जा रहा है।




