
मुंबई। टोरेस घोटाले में गिरफ्तार हवाला ऑपरेटर अल्पेश प्रवीणचंद खारा ने निवेशकों से एकत्र धन का उपयोग कर दक्षिण मुंबई में तीन फ्लैट खरीदने के लिए कथित तौर पर अग्रिम राशि का भुगतान किया था।
जांच में सामने आया है कि इस घोटाले में 14,157 निवेशकों से कुल 142 करोड़ रुपए का गबन किया गया, जिसे प्लेटिनम हॉर्न प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से अंजाम दिया गया था। इसमें विदेशी नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही। खारा ने अर्थ दर्शन बिल्डिंग की 24वीं मंजिल पर तीन अपार्टमेंट के लिए 1.25 करोड़ रूपए अग्रिम के रूप में दिए थे। भुगतान दो किस्तों में हुआ- 26 नवंबर, 2024 और 7 जनवरी, 2025 को। हालांकि, बिल्डर के अनुसार, खारा पूरे ₹2 करोड़ का भुगतान नहीं कर पाया, जिसके चलते फ्लैटों का पंजीकरण पूरा नहीं हो सका।
इस घोटाले में भारतीय निवेशकों से नकद एकत्र कर उसे खारा को सौंपा गया, जिसने इसे USDT (एक क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया और विदेश भेज दिया। चार्जशीट के मुताबिक, खारा और उनकी पत्नी के स्वामित्व वाले एक ज्वेलरी स्टोर के बैंक खाते में कुछ धनराशि जमा की गई, जिसे बाद में उनकी पत्नी और बेटे के खातों में ट्रांसफर किया गया और इन निधियों का उपयोग गिरगांव में तीन अपार्टमेंट खरीदने में किया गया।
आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने जांच के दौरान पाया कि खारा टोरेस ब्रांड के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था और उसने 41 लाख रुपये के हीरे खरीदे थे, जिनका इस्तेमाल निवेशकों को लुभाने के लिए किया गया था। इसके अलावा, खारा ने जांच के दौरान अपने मोबाइल फोन से कुछ महत्वपूर्ण डेटा डिलीट कर दिया, जिसे अधिकारी अब साइबर फोरेंसिक टीम की मदद से रिकवर करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले में 8 यूक्रेनी और 1 तुर्की नागरिक सहित कम से कम 11 आरोपी फरार हैं। मुंबई पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) मामले की तह तक पहुंचने के लिए लगातार काम कर रही है। इंटरपोल ने विदेशी संदिग्धों के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। मुख्य आरोपी ओलेना स्टोयन, विक्टोरिया कोवलेंको, मुस्तफा कराकोच, ओलेक्सांद्र बोराविक, ओलेक्सांद्र जैपचेंको, ओलेक्सांद्र ब्रुनकीवस्का, ओलेक्सांद्र ट्रेडोखिब, आर्टेम ओलिफेरचुक और इयुरचेंको बताए जा रहे हैं। नौ आरोपी नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच पोलैंड, दुबई और बैंकॉक होते हुए भारत से भाग निकले। पुलिस को संदेह है कि वे फिलहाल बुल्गारिया में छिपे हैं, और इसकी पुष्टि की जा रही है। अब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, और अधिकारी इन आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट की मांग कर रहे हैं। इसके बाद इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाने की योजना है, जिससे विदेशी धरती पर उनकी गिरफ्तारी में मदद मिलेगी। मुंबई पुलिस की जांच जारी है, और इस बड़े निवेश धोखाधड़ी मामले में आगे की गिरफ्तारियों की उम्मीद है।




