
मुंबई। पालघर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में सामने आई घटना के मद्देनजर तथा जिले की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की जाएगी। यह जानकारी स्वास्थ्य राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने विधान परिषद के प्रश्नकाल के दौरान दी। यह प्रश्न गुरुवार को सदस्य चित्रा वाघ ने उठाया था, जबकि सदस्य प्रवीण दरेकर ने पूरक प्रश्न किया।
प्रसूति के दौरान डॉक्टर अनुपस्थित, कार्रवाई शुरू
राज्यमंत्री साकोरे-बोर्डीकर ने बताया कि पालघर जिले के एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूति के समय डॉक्टर की अनुपस्थिति की घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है तथा दो संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित और संस्थागत प्रसूति सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न उपाय लागू किए जा रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बायोमेट्रिक उपस्थिति और गुणवत्ता जांच अनिवार्य
राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति की निगरानी की जाती है। केंद्र सरकार के एनएक्यूओएस (NAQOS) ऐप के माध्यम से आठ मानकों पर पीएचसी, ग्रामीण अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की समय-समय पर जांच की जाती है। इसके अलावा लेबर रूम निरीक्षण कार्यक्रम और ‘कायाकल्प’ अभियान के तहत स्वच्छता एवं गुणवत्ता मानकों को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
रिक्त पदों पर जल्द होगी भर्ती
राज्यमंत्री ने बताया कि जिले में चिकित्सा अधिकारियों के 112 स्वीकृत पदों में से 34 पद रिक्त हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 87 पदों में से आठ पद खाली हैं। नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि नागरिकों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए सरकार आवश्यक ठोस कदम उठा रही है।




