
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र में मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं और राज्य को आंध्र प्रदेश की तर्ज पर कृषि, मत्स्य पालन और निर्माण क्षेत्र में कार्यक्रम लागू करने चाहिए। वर्षा निवास पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री फडणवीस ने मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र विकास, वित्तीय प्रावधानों और दीर्घकालिक, मध्यम एवं अल्पकालिक लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में पशुपालन और पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे, मत्स्य पालन एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे, ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे, ‘मैत्री’ संगठन के प्रवीण परदेशी सहित अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में लाखों परिवारों का जीवनयापन सुनिश्चित करता है। इस क्षेत्र में आर्थिक विकास की बड़ी संभावनाएं हैं, जिसके लिए एक व्यापक नीति तैयार कर उसे तेज गति से लागू किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को आवश्यक बताते हुए कहा कि राज्य 2047 तक मत्स्य पालन के क्षेत्र में प्रगति के माध्यम से विकसित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हो सकता है। फडणवीस ने सुझाव दिया कि मत्स्य पालन क्षेत्र की योजना और कार्यान्वयन को एक विज़न प्रबंधन इकाई की स्थापना के ज़रिए और अधिक कुशल बनाया जाए। विशेषज्ञों, अधिकारियों और स्थानीय हितधारकों की भागीदारी से तैयार विज़न दस्तावेज़ को विकास कार्यों में दिशा देने वाला बताते हुए उन्होंने वित्तीय प्रावधान बढ़ाने की घोषणा की। इस अवसर पर पंकजा मुंडे, नितेश राणे और जयकुमार गोरे ने विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं और बुनियादी ढाँचे के विकास संबंधी सुझाव दिए। बैठक में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में विकास के अवसरों के साथ-साथ एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में आवश्यक नीतिगत सुधारों पर भी चर्चा हुई।




