
नियम तोड़ने पर जुर्माना, जेल और लाइसेंस रद्द होने की चेतावनी
ठाणे। ट्रैफिक नियमों का पालन केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं बल्कि जीवन की सुरक्षा के लिए अनिवार्य शर्त बताते हुए ठाणे के जिला कलेक्टर डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल ने नागरिकों से सड़क सुरक्षा को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। वे “सड़क सुरक्षा अभियान – 2026” के ग्रैंड फिनाले कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना, जेल की सजा और ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। “ठाणे कार्निवल” के नाम से जाना जाने वाला यह सड़क सुरक्षा अभियान 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर शुरू किया गया था। इस अभियान का उद्घाटन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुम्बरे ने किया था। समापन समारोह शनिवार, 31 जनवरी को साकेत पुलिस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स मैदान में आयोजित किया गया। यह पहल ठाणे पुलिस आयुक्त के निर्देशों तथा पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) पंकज शिरसाट के मार्गदर्शन में ठाणे शहर ट्रैफिक शाखा द्वारा संचालित की गई। अपने संबोधन में डॉ. पांचाल ने कहा कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं को कुछ सरल व्यवहारिक बदलावों से रोका जा सकता है। उन्होंने हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग, लेन अनुशासन बनाए रखने, गति सीमा का पालन करने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के प्रयोग से बचने, ट्रैफिक सिग्नल व ज़ेबरा क्रॉसिंग का सम्मान करने तथा शराब पीकर वाहन चलाने के खिलाफ सख्त ज़ीरो-टॉलरेंस नीति अपनाने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में जिले भर से 2,000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। रोड सेफ्टी पेट्रोल (आरएसपी) के सदस्यों द्वारा किया गया अनुशासित मार्च-पास्ट जनजागरूकता का प्रमुख आकर्षण रहा। समारोह के दौरान जिला कलेक्टर डॉ. पांचाल और संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. ज्ञानेश्वर चव्हाण ने मार्च-पास्ट, बैंड और पेंटिंग प्रतियोगिताओं के विजेता छात्रों को पुरस्कार प्रदान किए। साथ ही आरएसपी इकाइयों के शिक्षकों को भी युवाओं में नागरिक अनुशासन और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. ज्ञानेश्वर चव्हाण ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य “सड़क सुरक्षा – जीवन सुरक्षा” के संदेश के माध्यम से जान-माल के नुकसान को कम करना है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे आगे आकर ‘रोड सेफ्टी एंबेसडर’ बनें और समाज में सुरक्षित यातायात की संस्कृति को मजबूत करें। यह एक महीने तक चलने वाला अभियान परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से संचालित किया गया, जिसमें जागरूकता रैलियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया गया।




