
नागपुर। एनजीओ द्वारा संचालित आश्रमशालाओं के शिक्षकों को स्कूल संहिता के अनुसार वेतनश्रेणी देने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है। सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने विधान परिषद में जानकारी देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव जल्द ही वित्त विभाग को भेजा जाएगा और इसके बाद कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह मुद्दा सदस्य विक्रम काले द्वारा उठाया गया था, जिसमें अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे आवासीय और गैर-आवासीय प्राथमिक एवं माध्यमिक आश्रम शालाओं के शिक्षकों की वेतनश्रेणी का प्रश्न शामिल था। इस चर्चा में सदस्य किरण सरनाईक ने भी भाग लिया। मंत्री शिरसाट ने कहा कि यह विषय कई वर्षों से लंबित है और सरकार का प्रयास है कि शिक्षकों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो। उन्होंने जानकारी दी कि राज्यभर से आश्रम शालाओं के स्थानांतरण और पुनर्स्थापना के लिए प्राप्त 1,700 प्रस्तावों की जांच की जा रही है, जिनमें से प्रारंभिक चरण में 20 संस्थाओं का चयन किया जाएगा। राज्य में 322 एनजीओ द्वारा संचालित आश्रमशालाओं ने केंद्र की सब्सिडी योजना के तहत प्रस्ताव भेजे थे, मगर इनमें से केवल 34 स्कूलों को ही सब्सिडी मिल सकी। शेष संस्थाएं वर्ष 2002 से स्वयं के खर्च पर स्कूल चला रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में, राज्य सरकार ने वर्ष 2019-20 से “शाहू, फुले, अंबेडकर आवासीय विद्यालय योजना” शुरू की, जिसके तहत 165 आश्रमशालाओं को 20 प्रतिशत सब्सिडी स्वीकृत की गई। हालांकि, सब्सिडी वितरण अब तक शुरू नहीं हो सका क्योंकि इसके नियम एवं शर्तें तय नहीं हुई थीं। शिरसाट ने बताया कि U-DISE प्रणाली के आंकड़ों का अध्ययन कर सब्सिडी नियमन तैयार किया जा रहा है। उच्चस्तरीय सचिव समिति की मंजूरी मिलते ही सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि लम्बे समय से लंबित इस मुद्दे पर कैबिनेट जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेगी, जिससे आश्रम शालाओं के शिक्षकों को उचित वेतनश्रेणी और संस्थाओं को स्थिर आर्थिक सहायता मिल सकेगी।




