Sunday, March 22, 2026
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होनहार बेटी ने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएशन एग्जाम उत्तीर्ण कर क्षेत्र का नाम किया रोशन

देवेश प्रताप सिंह राठौर
बांगरमऊ, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)। एक छोटे से गांव के परिषदीय विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाली होनहार बेटी ने कड़ी मेहनत और लगन के बल पर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) उत्तीर्ण कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भी प्रतिभा को निखारने में किसी भी प्रतिष्ठित स्कूल से कम नहीं हैं। ग्राम मदार नगर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रहमत अली की पुत्री डॉ. सना सैय्यद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की पढ़ाई बांगरमऊ के आरडीएस इंटर कॉलेज से पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने रूस की नॉर्दर्न मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लिया और वहां से एमबीबीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) को भी पहले प्रयास में सफलतापूर्वक पास किया। डॉ. सना सैय्यद सात भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं और गांव की इकलौती बेटी हैं, जिन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। उनकी इस सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों और परिजनों ने इसे क्षेत्र के लिए गर्व की बात बताया है। उनकी उपलब्धि गांव की उन सभी बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रही हैं। परिजनों के अनुसार, पिता रहमत अली और माता शमीना ने बेटी की पढ़ाई के लिए अपनी हज यात्रा तक स्थगित कर दी थी, ताकि सना को विदेश भेजकर डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया जा सके। पढ़ाई के दौरान सना की माता का निधन हो गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से विचलित हुए बिना कठिन परिश्रम जारी रखा और सफलता हासिल की। प्राथमिक विद्यालय मदार नगर में उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक विजय मिश्रा ने बताया कि सना शुरू से ही मेधावी, अनुशासित और परिश्रमी छात्रा रही हैं। उन्होंने कहा कि सना की सफलता यह संदेश देती है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प हो, तो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

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