
पणजी। महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख इंजन हैं और “वेस्टर्न गेटवे” के रूप में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। राहुल नार्वेकर ने कहा कि इन राज्यों के बीच आपसी सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान और नीतिगत समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता है। गुरुवार को राष्ट्रकुल संसदीय मंडल के महाराष्ट्र–गोवा–गुजरात (विभाग-7) की वार्षिक परिषद का आयोजन पणजी में किया गया, जिसका उद्घाटन सत्र ओम बिर्ला की अध्यक्षता में 9 और 10 अप्रैल 2026 को हो रहा है। इस अवसर पर हरिवंश सिंह, राम शिंदे, नीलम गोऱ्हे, अण्णा बनसोडे सहित विभिन्न राज्यों के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। गोवा विधानसभा अध्यक्ष गणेश गावकर और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी अपने विचार रखे। राहुल नार्वेकर ने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने में युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक की समझ, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण से लैस युवा विधायक लोकतंत्र को नई ऊर्जा देंगे। साथ ही उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे केवल प्रचार तक सीमित न रहकर जनहित के मुद्दों पर गंभीर और जिम्मेदार तरीके से काम करें। उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के विधायी योगदान का उदाहरण देते हुए संसदीय परंपराओं और गहन अध्ययन के महत्व पर जोर दिया। अरबी सागर को इन तीनों राज्यों की साझा संपत्ति बताते हुए नार्वेकर ने “ब्लू इकोनॉमी” को प्राथमिकता देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार, बंदरगाह विकास और तटीय कनेक्टिविटी को मजबूत कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सकती है। साथ ही, शहरीकरण के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, मैंग्रोव और पश्चिमी घाट के संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने सहकारी संघवाद को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि राज्य एक-दूसरे के सफल मॉडलों को अपनाकर सामूहिक विकास की दिशा में आगे बढ़ें। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।




