
मुंबई। नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना 2.0 के माध्यम से सूखा प्रभावित क्षेत्रों की कृषि अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। जलवायु-सक्षम और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु सूक्ष्म नियोजन कर चरणबद्ध कार्यवाही करने के निर्देश कृषि, वित्त एवं नियोजन, राहत एवं पुनर्वसन, श्रम तथा विधि एवं न्याय राज्यमंत्री एडवोकेट आशिष जायसवाल ने दिए हैं। बुधवार को नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी कार्यालय के सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में राज्यमंत्री एडवोकेट आशिष जायसवाल ने परियोजना 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। इस अवसर पर परियोजना निदेशक परिमल सिंह, कृषि विभाग के उप सचिव श्री चंदनशिवे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि परियोजना के पहले चरण की सफल क्रियान्वयन की पृष्ठभूमि में अब दूसरे चरण में टिकाऊ और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने में सक्षम कृषि को और व्यापक स्वरूप दिया जाना चाहिए। जो किसान केवल कृषि आय पर निर्भर हैं, उन्हें परियोजना 2.0 के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं का लाभ देकर आर्थिक रूप से सशक्त किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि योजना के मूल लाभार्थी किसी भी स्थिति में लाभ से वंचित न रहें। उन्होंने कहा कि किसानों को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न परिस्थितियों के अनुरूप ढालने, कृषि लाभप्रदता बढ़ाने तथा योजना का लाभ लेने वाले किसानों की फसलों को वन्य प्राणियों से सुरक्षित रखने के लिए भी प्राथमिकता के आधार पर उपाय किए जाएं। इसके लिए कृषि, आदिवासी विकास और वन विभाग के साथ संयुक्त बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। राज्यमंत्री जायसवाल ने यह भी कहा कि योजना का लाभ लेने वाले किसानों की सफलता की कहानियां (यशोगाथाएं) तैयार की जाएं तथा योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। इस अवसर पर परियोजना निदेशक परिमल सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना 1.0 के अंतर्गत लागू योजनाओं, लाभार्थी किसानों तथा उससे प्राप्त उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले चरण में स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई के माध्यम से रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों के क्षेत्र में वृद्धि हुई है, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साथ ही परियोजना 2.0 के तहत किए जाने वाले नए उपक्रमों की भी जानकारी दी गई।




