
मुंबई। राज्य के कई आदिवासी विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए दूरदराज के इलाकों से मुंबई, पुणे जैसे बड़े शहरों में आते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को उनके शैक्षणिक परिसर के पास सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुंबई और पुणे विश्वविद्यालय के परिसरों में छात्रावास निर्माण को लेकर बुधवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक वुईके की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. रविंद्र कुलकर्णी, पुणे विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुरेश गोसावी, ठाणे के अपर आयुक्त गोपीचंद कदम, सहसचिव मच्छिंद्र शेळके तथा मुख्य अभियंता उज्ज्वल डाबे उपस्थित थे। इस अवसर पर आदिवासी विकास मंत्री डॉ. वुईके ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आदिवासी विकास विभाग निरंतर प्रयासरत है। पढ़ाई के लिए कई विद्यार्थी अपने जिले से बाहर अन्य जिलों में जाते हैं। प्रस्तावित छात्रावासों का लाभ केवल विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ने वाले आदिवासी विद्यार्थियों को भी मिलेगा। इससे एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सुरक्षित और किफायती आवास सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में राज्य के अन्य प्रमुख विश्वविद्यालय परिसरों में भी इसी प्रकार की छात्रावास सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही आदिवासी समाज के इतिहास और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रमुख विश्वविद्यालयों में आदिवासी अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र शुरू करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।




