
‘मुंबई (इंद्र यादव)। नवी मुंबई में बुजुर्गों को अपनी बातों के जाल में फंसाकर उनके सोने के गहने उड़ाने वाली एक अंतरराज्यीय गैंग का रबाले पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो मुंबई, ठाणे और गुजरात तक ठगी की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।क्या था पूरा मामलायह घटना 24 दिसंबर 2025 की है। रबाले गांव की रहने वाली 59 वर्षीय अनुसया दत्ता शिंदे जब दोपहर करीब 12:10 बजे अपने काम से घर लौट रही थीं, तभी लुटेरों ने उन्हें रोका। ठगों ने बड़ी ही मासूमियत से कहा, “हमारे सेठ को बेटा हुआ है, आगे साड़ियां बांटी जा रही हैं।” बातों-बातों में झांसा देकर उन्होंने महिला को अपने सोने के गहने उतारने पर मजबूर कर दिया और करीब 1.54 लाख रुपये कीमत के 11 ग्राम सोने के आभूषण लेकर रफूचक्कर हो गए। महिला की शिकायत पर रबाले पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 318(4) व 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया था।CCTV और मुखबिरों के जाल में फंसे आरोपीवरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बाळकृष्ण सावंत के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक दीपक खरात और उनकी क्राइम डिटेक्शन टीम ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने.घटनास्थल के आसपास के दर्जनों CCTV फुटेज खंगाले।तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) की मदद ली।अपने खुफिया तंत्र (मुखबिरों) को सक्रिय किया।ठोस जानकारी मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:अशोक विठ्ठल काले (22 वर्ष) – निवासी कोपरखैरणे।विष्णु शिवाजी पवार (27 वर्ष) – निवासी कोपरखैरणे।लखन उर्फ कार्तिक दारासिंग काले (19 वर्ष) – निवासी कोपरखैरणे।गुजरात से मुंबई तक फैला था जालपूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह गैंग केवल नवी मुंबई ही नहीं, बल्कि मुंबई शहर, ठाणे और गुजरात के विभिन्न इलाकों में भी सक्रिय थी। ये लोग अक्सर अकेले जा रहे बुजुर्गों को निशाना बनाते थे और ‘मुफ्त सामान’ या ‘मदद’ का लालच देकर उनके कीमती गहने लूट लेते थे।जांच टीम की सफलताइस बड़ी कामयाबी में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बाळकृष्ण सावंत, पुलिस निरीक्षक बनसोडे और संजय गवली के नेतृत्व में सपोनि दीपक खरात, हवलदार दर्शन कटके, मयूर सोनवणे, गणेश वीर, धनाजी भांगरे, यादवराव घुले और मनोज देडे ने अहम भूमिका निभाई।पुलिस की अपील: किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों में आकर अपने गहने या कीमती सामान उनके हवाले न करें। ‘मुफ्त साड़ी’, ‘बोनस’ या ‘मदद’ के झांसे से बचें।




