
मुंबई। बीते 61 वर्षों से सामान्य परिवारों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रही श्री नारायण मंदिर समिति का कार्य अत्यंत सराहनीय और प्रेरणास्पद है। समाज को ऐसे और अधिक संस्थानों की आवश्यकता है जो विद्यार्थियों को शिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएँ, ऐसा मत महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी.राधाकृष्णन ने व्यक्त किया। राज्यपाल श्री राधाकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति में संस्था का 61वां वार्षिकोत्सव समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष एन.मोहनदास, राज्यपाल के उपसचिव एस.राममूर्ति, उपाध्यक्ष एस.चंद्रबाबू, अन्य पदाधिकारी, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में आमंत्रित अतिथि उपस्थित थे।
गरीब विद्यार्थियों को शिक्षा देकर बदला जीवन
राज्यपाल ने अपने भाषण में कहा कि इस संस्था ने अब तक 9,000 से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षित कर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। उन्होंने कहा कि नारायण गुरु ने जाति और धर्म के भेदभाव से परे एक समरसतामूलक समाज की कल्पना की थी और यदि हम उनके आदर्शों को आत्मसात करें, तो निश्चित रूप से समाज में समानता और प्रगति संभव है। राज्यपाल ने कहा कि श्री नारायण मंदिर समिति द्वारा पिछले छह दशकों से गरीब विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना, समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। इस अवसर पर सांसद संजय दीना पाटिल ने कहा कि हम अपने पिता दीना बामा पाटिल के समय से इस संस्था के साथ जुड़े रहे हैं। यह संस्था जिस समर्पण के साथ शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही है, वह अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण में कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यपाल ने संस्थान परिसर स्थित श्री नारायण गुरु मंदिर में जाकर आरती की। इसके पश्चात उन्होंने संस्थान की स्मारिका का विमोचन किया और संस्था के पूर्व पदाधिकारियों का सम्मान भी किया। संस्था के महासचिव ओ.के.प्रसाद ने अतिथियों का परिचय कराया, वहीं अध्यक्ष एम.आई.दामोदरन ने संस्था के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। अंत में उपाध्यक्ष एस. चंद्रबाबू ने सभी उपस्थितजनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया।



