
अहिल्यानगर। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रहे युद्ध और संघर्षों का प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में भारत की कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना और देश की अन्न सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। देश की खाद्य सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा भारतीय कृषि का भविष्य तकनीक आधारित उपायों, स्टार्टअप और टिकाऊ खेती पद्धतियों पर निर्भर करेगा। यह विचार जिष्णु देव वर्मा ने व्यक्त किए। वे महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के भारतरत्न बी.आर.अंबेडकर सभागार में आयोजित 39वें दीक्षांत समारोह में दीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल के हाथों महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ (मानद) उपाधि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विधान परिषद के सभापति राम शिंदे, जल संसाधन मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, कृषि मंत्री एवं विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति दत्तात्रय भरणे, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक अशोक कुमार सिंह, विश्वविद्यालय के कुलगुरु विलास खर्चे तथा राज्यपाल के सचिव प्रशांत नारनवारे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ के साथ ‘जय अनुसंधान’ का नारा दिया है, जो कृषि क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तकनीकी प्रगति और बदलते वैश्विक परिदृश्य के कारण कृषि क्षेत्र में दूरदर्शी नेतृत्व और नवाचार की आवश्यकता बढ़ गई है। प्राकृतिक और टिकाऊ खेती पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश के पहले रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन की स्थापना जैसे कदम विश्वविद्यालय की सराहनीय पहल हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए छात्रों से अपील की कि वे केवल नौकरी की तलाश न करें, बल्कि कृषि नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार और ग्रामीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
टिकाऊ खेती के लिए कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शोध आवश्यक : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पिछले दस वर्षों में राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में बुनियादी बदलाव लाने का प्रयास किया है। कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए मजबूत आधारभूत संरचना का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्षा की हर बूंद को संचित करने के उद्देश्य से राज्य में जलयुक्त शिवार योजना लागू की गई, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि हुई है। इसी प्रकार ‘मागेल त्याला शेततळे’ योजना के क्रियान्वयन में अहिल्यानगर जिला अग्रणी रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को पानी के साथ बिजली सुरक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री सौर कृषि योजना शुरू की गई है और वर्ष के अंत तक राज्य में 14 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इससे किसानों को दिन में 12 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है।’अॅग्रीस्टॅक’ योजना के तहत राज्य में 1 करोड़ 30 लाख किसानों को डिजिटल पहचान दी गई है। इस डेटा का उपयोग कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए जाएंगे। ‘महाविस्तार ऐप’ के जरिए किसानों को सलाह दी जा रही है। उनके अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से 25 प्रतिशत तक उत्पादन लागत कम और 50 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ाने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को कर्ज से मुक्त करने के लिए टिकाऊ खेती का मॉडल महत्वपूर्ण होगा। अगले दस वर्षों में कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य सरकार और कृषि स्नातकों को मिलकर काम करना होगा। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और रासायनिक उपयोग कम करना जरूरी है, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे। छोटे किसानों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाने से सकारात्मक परिवर्तन संभव होगा। उत्पादन लागत घटाने के साथ मूल्य श्रृंखला विकसित करना भी आवश्यक है। राज्य सरकार कृषि तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि कृषि विद्यार्थियों से परिवार और समाज को बहुत अपेक्षाएं हैं। छात्रों को नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाले कृषि उद्यमी बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक का उपयोग अनिवार्य हो गया है और इस दिशा में व्यापक शोध की आवश्यकता है। पूर्व निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में कृषि क्षेत्र का बड़ा योगदान है। हरित क्रांति और तकनीक की मदद से देश के खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए न करें, बल्कि किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए समर्पित करें। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. विलास खर्चे ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले पांच दशकों में विश्वविद्यालय ने 1.5 लाख से अधिक कुशल मानव संसाधन तैयार किए, 320 उच्च उत्पादक फसल किस्में तथा 56 कृषि उपकरण विकसित किए हैं और 6,284 पौध आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण किया है। इस दीक्षांत समारोह में कुल 4,602 छात्रों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 4,182 स्नातक, 346 स्नातकोत्तर और 74 पीएचडी विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। इसके अलावा शैक्षणिक वर्ष में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 42 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।




