
नई दिल्ली। राष्ट्रकुल संसदीय परिषद (सीपीए) के माध्यम से भारत की लोकतांत्रिक विरासत वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त रूप से सामने आएगी। साथ ही यह परिषद लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए एक दिशादर्शक सिद्ध होगी, ऐसा विश्वास महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने व्यक्त किया है। नई दिल्ली में 14 से 16 जनवरी 2026 के बीच आयोजित राष्ट्रकुल संसदीय परिषद में राम शिंदे ने सहभाग लिया। परिषद के दूसरे दिन उन्होंने महाराष्ट्र सदन में मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए इस वैश्विक सम्मेलन के महत्व और इसमें होने वाली चर्चाओं की विस्तृत जानकारी दी। इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित 42 देशों के संसदीय अध्यक्ष और भारत के सभी राज्यों के पीठासीन अधिकारी उपस्थित थे। श्री शिंदे ने कहा कि भारत को चौथी बार इस सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिलना लोकतंत्र की जननी के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री के भाषण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र किस प्रकार मजबूत हुआ है, इसका प्रभावी प्रस्तुतीकरण वैश्विक मंच पर किया गया। बदलते समय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संसदीय कार्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक के उपयोग पर प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संकेत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इससे संसदीय कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और तेज होगी, जो देश को प्रगति की दिशा में आगे ले जाएगी। श्री शिंदे ने बताया कि जिन देशों में लोकतांत्रिक और संसदीय व्यवस्था है, वहां लोकतांत्रिक मूल्यों का संवर्धन करना इस परिषद का मुख्य उद्देश्य है। सम्मेलन में विभिन्न देशों की आंतरिक चुनौतियों, उन पर लोकतांत्रिक तरीके से निकाले गए समाधान और श्रेष्ठ संसदीय प्रथाओं पर गहन मंथन किया जा रहा है। साथ ही सभी प्रतिनिधि अपनी-अपनी संसदीय प्रणालियों को और अधिक परिपक्व बनाने पर भी चर्चा कर रहे हैं।




