
मुंबई। भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छता तक पहुंच को “बुनियादी मानवाधिकार” करार देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवंडी स्थित बुद्ध नगर झुग्गी बस्ती में शौचालयों की भारी कमी और बदहाल हालत को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि झुग्गी बस्ती अतिक्रमण वाली ज़मीन पर स्थित है, नगर निगम अपनी संवैधानिक और वैधानिक ज़िम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की खंडपीठ ने 3 फरवरी को चेतन सामाजिक प्रतिष्ठान द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बीएमसी को मौजूदा टॉयलेट ब्लॉकों की तत्काल मरम्मत करने और झुग्गी बस्ती की आबादी के अनुपात में दो महीने के भीतर अतिरिक्त शौचालय सुविधाएं विकसित करने का निर्देश दिया। याचिका में बताया गया कि लगभग 1.83 लाख वर्ग मीटर नगरपालिका की भूमि पर फैली इस झुग्गी बस्ती में 4,000 से अधिक निवासियों के लिए मात्र 60 टॉयलेट सीट उपलब्ध हैं, जो पूरी तरह से अपर्याप्त हैं। कोर्ट के समक्ष पेश की गई तस्वीरों में टॉयलेट ब्लॉक अत्यंत खराब हालत में, बिना उचित रखरखाव के और गंभीर रूप से अस्वच्छ स्थिति में दिखाई दिए। पीठ ने यह भी नोट किया कि यद्यपि ज़मीन का एक छोटा हिस्सा झुग्गी पुनर्वास परियोजना के अंतर्गत आता है, लेकिन बस्ती का बड़ा क्षेत्र नागरिक उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छता सुविधाएं प्रदान करना केवल प्रशासनिक विवेक का विषय नहीं, बल्कि यह मुंबई नगर निगम अधिनियम के तहत एक वैधानिक कर्तव्य है। पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “ऐसा नहीं हो सकता कि नगर निगम झुग्गी बस्ती होने के आधार पर पर्याप्त स्वच्छता और शौचालय जैसी बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं की अनदेखी करे।” कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि स्वच्छता तक पहुंच सीधे तौर पर जीवन के अधिकार से जुड़ी हुई है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं का पर्याप्त प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी आबादी के लिए शौचालयों की “बहुत कम” संख्या न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के समान है। कोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया कि वह झुग्गी बस्ती के भीतर उपलब्ध खुली जगहों की पहचान कर वहां नए टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण करे। साथ ही, सहायक नगर आयुक्त को मौजूदा सुविधाओं की तत्काल मरम्मत, नियमित सफाई और उचित स्वच्छता पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि झुग्गी बस्ती के निवासियों को साफ पानी और बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना नगर निगम की अनिवार्य जिम्मेदारी है, ताकि बीमारियों के फैलाव को रोका जा सके। याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी कि तय की गई समय-सीमा के भीतर निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए। पीठ ने कहा कि इन कर्तव्यों को निभाने में किसी भी प्रकार की विफलता को संविधान के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।



