Thursday, February 19, 2026
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश पर जूता फेंकनें की कोशिश, भारत पर एक कलंक है

इंद्र यादव
भारत, जो अपने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए विश्व भर में जाना जाता है, उसकी न्यायिक व्यवस्था पर हाल ही में हुआ एक हमला न केवल शर्मनाक है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर एक गहरा आघात है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, जो देश की सबसे बड़ी अदालत के सर्वोच्च प्रतीक हैं, पर जूता फेंकने की कोशिश निंदनीय और अस्वीकार्य है। यह घटना न केवल एक व्यक्ति विशेष पर हमला है, बल्कि भारत की न्यायिक स्वतंत्रता और सम्मान पर एक कलंक है। हाल ही में हुई इस शर्मनाक घटना में, एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश की। यह कृत्य न केवल आपराधिक है, बल्कि यह देश की न्यायिक प्रणाली के प्रति असम्मान का प्रतीक है। सुप्रीम कोर्ट वह संस्था है जो भारत के संविधान की रक्षा करती है, नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करती है और देश में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस तरह की हरकतें न केवल न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में अराजकता और अविश्वास का माहौल भी पैदा करती हैं। न्यायपालिका पर हमला, लोकतंत्र पर हमला है,सुप्रीम कोर्ट भारत के लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है। मुख्य न्यायाधीश पर इस तरह का हमला न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को भी कमजोर करता है। इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसक प्रवृत्तियों को दर्शाती हैं। असहमति व्यक्त करने का यह तरीका न केवल गलत है, बल्कि यह सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन भी है।अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को एक मजबूत लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है। इस तरह की घटनाएं भारत की छवि को धूमिल करती हैं और वैश्विक समुदाय में देश की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। यह घटना हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपने लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने के लिए एकजुट होना होगा। इस तरह के कृत्यों के खिलाफ कठोर और त्वरित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। समाज में शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से यह समझ विकसित करने की आवश्यकता है कि असहमति को सभ्य और लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए। न्यायाधीशों और न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि वे बिना किसी भय या दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश न केवल एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र, संविधान और न्यायिक व्यवस्था पर हमला है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम ऐसी घटनाओं की कठोर निंदा करें और अपने देश की गरिमा को बनाए रखें। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत की न्यायपालिका, जो हमारे लोकतंत्र का गौरव है, बिना किसी डर या खतरे के अपने कर्तव्यों का पालन कर सके। आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां सम्मान, संयम और संवाद ही असहमति व्यक्त करने का तरीका हो।

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