
मुंबई। 15 जनवरी 2026 को हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में बीजेपी–शिवसेना–महायुति गठबंधन की जीत के बाद अब शहर के मेयर पद को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज़ हो गई है। इस चुनावी नतीजे से शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को बड़ा झटका लगा है। इसी बीच यह चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि इस बार मुंबई का मेयर बीजेपी का हो सकता है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना पर गंभीर आरोप लगाए। मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए राउत ने कहा कि बीजेपी के पास बीएमसी में स्पष्ट बहुमत नहीं है, इसके बावजूद मेयर पद हथियाने की कोशिश की जा रही है। संजय राउत ने कहा- नरेंद्र मोदी बीजेपी का मेयर चाहते हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कैसे। बीजेपी के पास पूरा बहुमत नहीं है। शिंदे गुट के जो कॉर्पोरेटर जीते हैं, उन्हें ताज लैंड्स एंड होटल में रखा गया है। यह होटल अब जेल बन चुका है। केंद्र में सरकार है, महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस जैसे ताकतवर मुख्यमंत्री हैं, फिर भी कॉर्पोरेटरों को कैदियों की तरह बंद करके रखना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एकनाथ शिंदे अपनी पार्टी के नवनिर्वाचित कॉर्पोरेटरों को “बंधक” बनाकर रखे हुए हैं ताकि बीजेपी का मेयर बनवाया जा सके। राउत ने कहा कि सभी विपक्षी दलों ने मिलकर तय किया है कि किसी भी हालत में बीजेपी का मेयर नहीं बनने दिया जाएगा। राउत ने आगे कहा- कॉर्पोरेटरों में कई नए चेहरे हैं। वे शिवसैनिक हैं और बीजेपी का मेयर नहीं चाहते। आज के दौर में संचार के कई माध्यम हैं, चाहे उन्हें कितना भी बंद करके रखा जाए, संदेश बाहर पहुँच ही जाता है। अगर भगवान की मर्जी हुई, तो शिवसेना का मेयर चुना जा सकता है। इतिहास गवाह है कि बहुमत चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह चंचल होता है और बदलता रहता है। इस दौरान संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा और उन्हें बीजेपी का “कठपुतली” बताया। उन्होंने कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या देवेंद्र फडणवीस, अमित शाह के दबाव में बीजेपी के मेयर को स्वीकार करेंगे। राउत ने दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डबल्यूईएफ़) के दौरान की गई निवेश घोषणाओं को भी खारिज करते हुए कहा कि चुनावी माहौल में ऐसी घोषणाएँ अक्सर कागज़ों तक ही सीमित रह जाती हैं और ज़मीन पर उनका असर बहुत कम दिखता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मुंबई का मेयर “असली शिवसेना” का होना चाहिए, न कि “नकली” शिवसेना का। साथ ही, बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर शिवसेना का मेयर चुना जाना ऐतिहासिक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया। कांग्रेस की वजह से वोटों के बंटवारे को लेकर पूछे गए सवाल पर संजय राउत ने भरोसा जताया कि भविष्य में कांग्रेस शिवसेना (यूबीटी) के साथ आएगी। उन्होंने कहा- कांग्रेस एक नेशनल पार्टी है, वह अपने फैसले खुद लेती है। इस बार वोट बंटने से बीजेपी को फायदा हुआ, लेकिन आगे कांग्रेस हमारे साथ होगी। उन्हें बधाई, उन्हें सीटें मिली हैं। मुंबई में कांग्रेस की ताकत है और बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में उनकी सीटें हमारे साथ हैं। बीएमसी चुनाव के बाद मेयर पद को लेकर यह सियासी संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज़ होने के संकेत दे रहा है, जिससे मुंबई की राजनीति में नए समीकरण उभर सकते हैं।




