Friday, March 13, 2026
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कतर में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की आतंकवाद पर दो टूक, ऑपरेशन सिंदूर को बताया निर्णायक कदम

दोहा/नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में एक सर्वदलीय भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को कतर की शूरा परिषद से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद पर भारत की कड़ी और एकीकृत नीति को सामने रखा और हाल ही में भारतीय सेना द्वारा किए गए “ऑपरेशन सिंदूर” की अहमियत से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल में बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी, अनुराग ठाकुर, वी.मुरलीधरन, कांग्रेस के मनीष तिवारी और आनंद शर्मा, तेलुगु देशम पार्टी के लवू श्रीकृष्ण देवरायलु, आम आदमी पार्टी के विक्रमजीत सिंह साहनी और पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन शामिल थे। कतर के विधायी निकाय से बातचीत में भारतीय प्रतिनिधियों ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई “ऑपरेशन सिंदूर” की जानकारी साझा की, जिसे एक सटीक और सीमित सैन्य प्रतिक्रिया बताया गया। उन्होंने वैश्विक समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ भारत के संघर्ष में समर्थन का आग्रह किया। यह प्रतिनिधिमंडल कतर जैसे रणनीतिक साझेदार के साथ संबंधों को और मज़बूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाल के हफ्तों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच आतंकवाद के मुद्दे पर निरंतर संवाद हुआ है। उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में कतर के अमीर की भारत यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी की औपचारिक घोषणा हुई थी, और अब इस दौरे के माध्यम से भारत आतंकवाद पर “जीरो टॉलरेंस” नीति को वैश्विक स्तर पर और अधिक स्पष्टता से सामने रखना चाहता है। प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को दोहा स्थित भारतीय दूतावास परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा- बापू के शांति और सहिष्णुता के आदर्शों को सम्मान देते हुए, सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में भारतीय सांसदों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी। आगामी दिनों में यह प्रतिनिधिमंडल दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया और मिस्र की यात्रा करेगा। इस दौरान संबंधित देशों के विधायी निकायों, थिंक टैंकों और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत के जरिए भारत का उद्देश्य आतंकवाद विरोधी रुख पर वैश्विक सहमति बनाना और “ऑपरेशन सिंदूर” जैसे अभियानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता दिलाना है।

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