
मुंबई। राज्य में हाल ही में संपन्न हुई महानगरपालिकाओं की चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर अव्यवस्था और गड़बड़ी सामने आई है। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने चुनाव प्रणाली को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अब चुनाव प्रक्रिया में कुछ क्रांतिकारी बदलाव करना अनिवार्य हो गया है। मुनगंटीवार ने सवाल उठाया कि क्या मतदान को अनिवार्य करने के लिए कानून बनाया जा सकता है, इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना जरूरी है। चूंकि अधिकांश नागरिकों का आधार मोबाइल नंबर से लिंक है, इसलिए उसी डेटा का उपयोग कर मतदाताओं को उनके मतदान केंद्र और संबंधित जानकारी सीधे उनके मोबाइल तक पहुंचाई जा सकती है या नहीं, इस पर प्रशासन को काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज़ादी के अमृत महोत्सव के बाद भी स्थिति यह है कि राज्य के एक मंत्री का ही नाम मतदाता सूची में नहीं है। जब मंत्रियों के नाम तक सूची में नहीं हैं, तो आम नागरिकों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने दो-दो घंटे तक कतार में खड़े रहकर मतदान करने वाले मतदाताओं को सलाम करते हुए कहा कि ऐसे समर्पित मतदाताओं के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। सुधीर मुनगंटीवार ने यह भी कहा कि राज्य में अलग-अलग चुनावों पर हर बार तीन से साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि पिछले वर्ष चुनाव आयोग द्वारा करीब साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उन्होंने सवाल किया कि इतना भारी खर्च करने के बाद भी अगर मतदाता असंतुष्ट है और मतदान नहीं कर पाने की पीड़ा व्यक्त कर रहा है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता बेचैन है और लोकतंत्र की इस मूल प्रक्रिया को सुचारू, पारदर्शी और मतदाता-केंद्रित बनाने के लिए प्रशासन को गंभीर सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।




