
मुंबई। राज्य में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अन्न व औषध प्रशासन (एफडीए) ने व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाकर खाद्य विक्रेताओं पर कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत कुल 12,693 जांच की गईं। इनमें 5,776 मामलों में सुधारात्मक नोटिस दिए गए, जबकि 167 लाइसेंस निलंबित किए गए और एक पंजीकरण रद्द किया गया। इसके अलावा 840 समझौता मामलों का निपटारा किया गया और संबंधित विक्रेताओं पर कुल 75 लाख 34 हजार 400 रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह जानकारी गुरुवार को अन्न व औषध प्रशासन मंत्रीनरहरी झिरवाल ने विधानसभा में दी। इस विषय पर विधायक सुनील कांबले ने प्रश्न उठाया था। चर्चा में विधायक सिद्धार्थ शिरोले, योगेश सागर, मनीषा चौधरी और सुरेश धास ने भाग लिया। मंत्री नरहरी झिरवाल ने बताया कि पनीर, दूध और खवा-मावा जैसे खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है और इसे रोकने के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। मिलावट पर नियंत्रण के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले फूड सेफ्टी ऑफिसर (एफएसओ) की संख्या कम होने के कारण जांच सीमित हो जाती थी। अब 197 अधिकारियों की नई भर्ती होने से जांच तंत्र अधिक मजबूत हो गया है और अगले तीन महीनों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। मंत्री ने बताया कि खाद्य जांच प्रयोगशालाओं की सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। पुणे और नासिक में नई प्रयोगशालाएं शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके साथ ही शहरों में विशेष रूप से चाइनीज फूड बेचने वाली गाड़ियों पर भी जांच अभियान चलाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री झिरवाल ने यह भी बताया कि खाद्य मिलावट रोकने के लिए कड़े कानून का प्रारूप तैयार किया गया है, जो फिलहाल विधि एवं न्याय विभाग के विचाराधीन है।




