
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक धागे/नायलॉन मांझे से होने वाले खतरों को रोकने के लिए कानून या ठोस नीति बनाने में महाराष्ट्र सरकार की निष्क्रियता पर कड़ी नाराज़गी जताई है। आगामी मकर संक्रांति त्योहार को देखते हुए कोर्ट ने पुलिस और नगर निकायों को नायलॉन मांझे के इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य की उदासीनता की कड़ी निंदा
जस्टिस मंगेश पाटिल और जस्टिस प्रफुल्ल खुबलकर की पीठ ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार इस गंभीर खतरे को रोकने के लिए न तो कोई स्पष्ट नीति बता सकी और न ही कानून बनाने की दिशा में अपने रुख से कोर्ट को अवगत करा सकी। पीठ ने टिप्पणी की कि 14 अन्य राज्यों द्वारा पहले ही इस दिशा में कदम उठाए जाने के बावजूद महाराष्ट्र सरकार की उदासीनता “अशोभनीय” है।
एक महीने तक सतर्क रहने के निर्देश
कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पुलिस और नगर निकाय अधिकारियों को कम से कम एक महीने तक ‘सतर्क’ और ‘चौकस’ रहने का निर्देश दिया है, ताकि नायलॉन मांझे के इस्तेमाल को प्रभावी रूप से रोका जा सके। साथ ही, पतंग और मांझा बेचने वाली दुकानों पर निगरानी रखने और नायलॉन धागे की सप्लाई, बिक्री और उपयोग में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। हाई कोर्ट ने पुलिस और नगर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस अवधि में की गई सभी कार्रवाइयों का रिकॉर्ड रखें और 16 जनवरी को अगली सुनवाई के दौरान अनुपालन रिपोर्ट पेश करें।
स्वतः संज्ञान और राज्य की रिपोर्ट
नायलॉन मांझे से होने वाली चोटों और मौतों की घटनाओं के बाद हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था। राज्य सरकार की ओर से पेश प्रगति रिपोर्ट में बताया गया कि सिंथेटिक या नायलॉन मांझे के उपयोग को रोकने के लिए मामले दर्ज किए गए, तलाशी अभियान चलाए गए और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि राज्य ने स्वीकार किया है कि नायलॉन मांझे के सप्लायरों को तो गिरफ्तार किया गया है, लेकिन इसके निर्माताओं तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है। इस पर पीठ ने कहा कि यह “कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया” बनती जा रही है, जबकि नायलॉन मांझे से समाज में लोगों के घायल होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। मकर संक्रांति जैसे शुभ पर्व को देखते हुए कोर्ट ने अतिरिक्त सख्त निर्देश जारी किए हैं।




