Wednesday, March 4, 2026
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राज्य उत्पादन शुल्क विभाग को मिलेगा नया रूप, राजस्व वृद्धि के उपायों को मंत्रिमंडल की मंजूरी

मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में राज्य उत्पादन शुल्क विभाग की संरचना में सुधार और राजस्व वृद्धि के उपायों को मंजूरी दी गई। राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से गठित सचिव-स्तरीय अध्ययन समूह ने अन्य राज्यों की मद्य-नीतियों का अध्ययन कर उत्पादन शुल्क, अनुज्ञप्तियों और कर संग्रहण की पद्धतियों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके आधार पर उत्पादन शुल्क विभाग की संशोधित संरचना, विभागीय एकीकृत नियंत्रण कक्ष की स्थापना, नई उत्पादन शुल्क दरें, और महाराष्ट्र मेड लिकर (MML) नामक एक नए उत्पाद को मंजूरी दी गई। अब मुंबई शहर और उपनगर में नया विभागीय कार्यालय, और मुंबई उपनगर, ठाणे, पुणे, नाशिक, नागपुर तथा अहिल्यानगर में अधीक्षक कार्यालय खोले जाएंगे। एकीकृत नियंत्रण कक्ष के जरिए राज्य की डिस्टिलरियों और मद्य इकाइयों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से निगरानी रखी जाएगी। उत्पादन शुल्क दरों में भी बदलाव किया गया है – IMFL (260 रुपये प्रति बल्क लीटर तक की मद्य) पर शुल्क दर को निर्मिति मूल्य के 3 गुना से बढ़ाकर 4.5 गुना किया गया है, देशी मद्य पर शुल्क 180 से बढ़ाकर 205 रुपये प्रति प्रूफ लीटर किया गया है, वहीं महाराष्ट्र मेड लिकर नामक नए ब्रांड के लिए न्यूनतम खुदरा मूल्य 148 रुपये तय किया गया है। इसके अलावा देशी मद्य की 180 मिली. बोतल की न्यूनतम कीमत 80 रुपये, IMFL की 205 रुपये और प्रीमियम विदेशी ब्रांड की 360 रुपये निर्धारित की गई है। साथ ही, राज्य में FL-2 (सीलबंद मद्य बिक्री) और FL-3 (होटल-रेस्टॉरेंट) अनुज्ञप्तियाँ अब Conducting Agreement के तहत पट्टे पर चलाई जा सकेंगी, जिन पर क्रमशः 15 प्रतिशत और 10 प्रतिशत अतिरिक्त वार्षिक शुल्क वसूला जाएगा।
1,223 पदों को मिली मंजूरी
विभाग को सशक्त बनाने के लिए 744 नई नियुक्तियाँ और 479 पर्यवेक्षणीय पद, कुल 1,223 पदों की संशोधित संरचना को मंजूरी मिली है।
राजस्व में 14,000 करोड़ की वृद्धि की संभावना
इन सभी उपायों के जरिए सरकार को मद्य पर शुल्क और बिक्री कर से सालाना लगभग ₹14,000 करोड़ की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय राज्य के उत्पादन शुल्क विभाग को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से और अधिक प्रभावी बनाएगा। इससे न केवल मद्य व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, बल्कि राज्य के राजस्व को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।

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