
मुंबई। विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोरहे की पहल पर मुंबई में “त्योहारों के दौरान महिला सुरक्षा, कानून व्यवस्था और शहर में आपदा प्रबंधन” विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर उपस्थित रहे, जबकि मुंबई पुलिस, मुंबई नगर निगम के आपदा प्रबंधन विभाग और महिला सतर्कता समितियों ने सक्रिय भागीदारी की। डॉ. गोरहे ने कहा कि त्योहारों में कानून व्यवस्था बनाए रखना, भीड़-भाड़ या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने महिला सतर्कता समितियों से स्थानीय पुलिस, बीट कांस्टेबल और सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय में काम करने की अपील की, साथ ही महिलाओं पर अत्याचार रोकथाम, लैंगिक समानता, कन्या भ्रूण हत्या और घरेलू हिंसा पर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। एडवोकेट राहुल नार्वेकर ने कहा कि महिलाओं की जोखिम पहचानने की क्षमता समाज की सुरक्षा में अत्यंत सहायक है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन, पुलिस और गैर-सरकारी संगठनों में महिलाओं की अधिक भागीदारी से अपराध और आपदाएं रोकी जा सकती हैं। उन्होंने गणेशोत्सव के दौरान नागरिकों को सतर्क रहने की अपील भी की। मुंबई पुलिस उपायुक्त विवेक पानसरे ने निर्भया दस्ता, महिला सहायता प्रकोष्ठ, विशेष किशोर इकाई, मोबाइल फोरेंसिक इकाई और अनैतिक मानव तस्करी रोकथाम प्रकोष्ठ जैसी व्यवस्थाओं को त्योहारों में अधिक सक्रिय करने की जानकारी दी। बम निरोधक दस्ते के वरिष्ठ निरीक्षक सचिन गावड़े ने संदिग्ध वस्तु, बैग या वाहन मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना देने की अपील की। महानगरपालिका आपदा प्रबंधन निदेशक महेश नार्वेकर ने बताया कि बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए नगर निगम पूरी तरह तैयार है और नागरिक 1916 हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन अविनाश रणखंब ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रशांत पिसल ने दिया। कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि महिला सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।




