
नोएडा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की दर्दनाक मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। इसी क्रम में गुरुवार देर रात नोएडा अथॉरिटी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के अध्यक्ष एवं एडीजी भानु भास्कर, मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के चीफ इंजीनियर अजय वर्मा शामिल हुए। बैठक के दौरान पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेधा रूपम, नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ कृष्ण करुणेश और एसीईओ सतीश पाल से पूरे मामले को लेकर विस्तृत जवाब तलब किया गया। बैठक में एसआईटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकरण में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शुक्रवार को घटना से जुड़े सभी तथ्यों और उठाए गए सवालों पर लिखित जवाब दाखिल करें। इसके साथ ही एसआईटी शुक्रवार को एक बार फिर नोएडा पहुंचेगी और अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और जवाबों की गहन समीक्षा करेगी। जानकारी के अनुसार, एसआईटी ने इस मामले में कुल सात प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। संबंधित विभागों की ओर से 60 से अधिक पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे जांच टीम को सौंपा जाएगा। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी रिपोर्ट भी एसआईटी को दी जाएगी। जांच टीम ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया है कि घटना के समय कंट्रोल रूम, फील्ड स्टाफ और संबंधित विभागों के बीच आपसी समन्वय का स्तर क्या था। साथ ही सूचना मिलने के बाद प्रशासन का रिस्पॉन्स टाइम कितना रहा और मौके पर युवराज को बचाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए। राहत और बचाव कार्यों में कहां और किस स्तर पर चूक हुई, इसकी भी गहन जांच की जा रही है। एसआईटी ने स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट आवंटन से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। जांच के दायरे में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि संबंधित सेक्टर में सड़क, सड़क सुरक्षा, पानी और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएं कब उपलब्ध कराई गईं और प्लॉट का पजेशन किस तिथि को दिया गया था। इसके साथ ही यह पहलू भी जांच में शामिल है कि युवराज की मौत से पहले उसी स्थान पर एक ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना हुई थी और उसके बाद प्रशासन व संबंधित विभागों द्वारा क्या एहतियाती कदम उठाए गए थे। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट सामने आने के बाद लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट 24 जनवरी को शासन को सौंपेगी। इस मामले को लेकर प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज है और पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश सरकार की कड़ी नजर बनी हुई है।




