
सहायक आयुक्त भी नगर अभियंता के आदेशों की उड़ा रही हैं धज्जियां
क्या नवनियुक्त महापौर रितु तावड़े लेंगी संज्ञान?
मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में प्रशासक के कार्यकाल के दौरान अधिकारियों द्वारा बीएमसी विभागों में भ्रष्टाचार और मनमानी कार्यभार का मुद्दा कई विधायकों ने उठाया, जिस पर सरकार की तरफ से कोई ठोस आश्वासन मिलता नहीं दिखा। लेकिन यह सच है कि प्रशासक के कार्यकाल में भ्रष्ट अभियंताओं ने बीएमसी को लूटा ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों के आदेशों को कूड़ेदान में डालने का भी काम किया है।
इसका जीता-जागता उदाहरण बीएमसी के एच/पूर्व विभाग में देखने को मिलता है, जहां कमीशनखोर अभियंताओं की बदली नगर अभियंता द्वारा किए जाने के बाद भी विभाग की सहायक आयुक्त से सेटिंग करके नगर अभियंता के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं और नगर अभियंता व अतिरिक्त आयुक्त भी कुछ नहीं कर सके।
बताया जाता है कि बीएमसी एच/पूर्व के परिरक्षण विभाग में सहायक अभियंता दीपक जाधव की बदली का आदेश एक बार नहीं बल्कि दो बार आया, लेकिन जैसे ही बदली का आदेश आता है, वे छुट्टी पर चले जाते हैं और बाद में फिर उसी जगह बने रहते हैं। सहायक अभियंता अजय पाटिल भी चार साल से एक ही जगह कुंडली मारकर बैठे हैं।
एक दुय्यम अभियंता विलास राठौड़, जिनकी नियुक्ति ब्रिज विभाग की हैं, लेकिन पिछले चार साल से एच/पूर्व परिरक्षण विभाग में सेटिंग करके बैठे हैं और जमकर कमीशनखोरी कर रहे है। वहीं इमारत व कारखाना विभाग की बात करें तो कनिष्ठ अभियंता सोनल आव्हाड भी पिछले चार सालों से वहीं कार्यरत हैं। उनकी भी बदली दो बार हुई, लेकिन वे जाने का नाम नहीं ले रही हैं। कनिष्ठ अभियंता रोहित गाजुल की बदली का आदेश आने के बाद भी वे जाने को तैयार नहीं हैं। सहायक अभियंता वैभव लव्हाले भी चार साल से एक ही जगह बैठे हैं।
बताया जाता है कि कई अभियंता ऐसे हैं जो चार सालों से एक ही जगह पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। नगर अभियंता के आदेशों का सहायक आयुक्त और अभियंता मिलकर मजाक उड़ा रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि ये अभियंता वार्ड में बैठकर भूमाफियाओं, ठेकेदारों और गैरकानूनी काम करने वालों के आका बने हुए हैं, जिसमें सहायक आयुक्त आंख बंद कर मलाई खा रही हैं। वहीं सवाल यह उठता है कि ऐसे सहायक आयुक्तों और अभियंताओं पर बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी और अतिरिक्त आयुक्त कोई कार्रवाई क्यों नहीं करते, जो प्रशासनिक आदेशों का मखौल उड़ा रहे हैं। कहीं न कहीं बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है।
अब देखना यह है कि क्या इस मामले की गंभीरता को समझते हुए नवनियुक्त महापौर रितु तावड़े संज्ञान लेंगी या फिर बीएमसी के सहायक आयुक्तों और अभियंताओं की मनमानी यूं ही चलती रहेगी।




