
मुंबई। मुंबई के गोवंडी क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बापूराव मधुकर देशमुख (57) को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। उन्हें मंगलवार रात एक स्कूल ट्रस्टी से 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, जो कथित रूप से 2.5 लाख रुपए की कुल मांग का एक हिस्सा था। यह रकम कथित तौर पर पुलिस सुरक्षा और एक कानूनी मामले में सहायता प्रदान करने के बदले मांगी गई थी। देशमुख की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय नागरिक समूह ‘कंसर्न्ड सिटिजन्स ऑफ गोवंडी’ ने शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली की न्यायिक एवं विभागीय जांच की मांग की है। नागरिकों ने आरोप लगाया कि देशमुख के कार्यकाल में कई मामलों में पक्षपात किया गया, भ्रष्टाचार के चलते अपराध या तो झूठे तरीके से दर्ज किए गए या फिर चुनिंदा रूप से आगे बढ़ाए गए। समूह ने यह भी आरोप लगाया कि कई निर्दोष नागरिकों को जानबूझकर फंसाया गया, जिससे उन्हें न्याय तक पहुंचने के मौलिक अधिकार से वंचित किया गया। बुधवार को नागरिकों ने मुंबई पुलिस आयुक्त, महाराष्ट्र गृह विभाग, एसीबी महानिदेशक, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) और लोकायुक्त को पत्र भेजकर कई अहम मांगें रखीं। इनमें देशमुख के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), व्हाट्सएप लॉग, बैंक खातों और अधीनस्थ अधिकारियों के साथ संवाद की फोरेंसिक ऑडिट शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उनके कार्यकाल के दौरान दर्ज सभी प्राथमिकी (एफआईआर) की कानूनी समीक्षा की मांग की और जिन नागरिकों को झूठे मुकदमों में फंसाया गया, उनके लिए अभियोजन समाप्त करने की मांग भी की। इस प्रकरण ने मुंबई पुलिस बल की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार के आरोपों पर कितनी गंभीरता और निष्पक्षता से कार्यवाही करता है।



