
नई दिल्ली। विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम लागू होने के बाद कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को बचाने के लिए देश भर में “मनरेगा बचाओ संग्राम” नाम से आंदोलन की घोषणा की है। यह आंदोलन तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने मनरेगा को लेकर भविष्य की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है और एक सुव्यवस्थित आंदोलन को मंजूरी दी है।
आंदोलन का पहला चरण: 8 से 11 जनवरी
वेणुगोपाल ने बताया कि आंदोलन का पहला चरण 8 जनवरी को शुरू होगा। इस दिन पार्टी के प्रदेश कार्यालयों (पीसीसी) में महासचिवों और प्रभारियों की मौजूदगी में पूरे दिन की तैयारी बैठकें होंगी।
10 जनवरी को जिला कांग्रेस समितियों (डीसीसी) के कार्यालयों में जिला-स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी।
11 जनवरी को जिला मुख्यालयों में महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष एक दिन का उपवास रखा जाएगा।
दूसरा चरण: 12 से 30 जनवरी
कांग्रेस के अनुसार आंदोलन का दूसरा चरण 12 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत-स्तरीय चौपालें आयोजित की जाएंगी और कांग्रेस अध्यक्ष का पत्र जनता के बीच वितरित किया जाएगा।
इसके साथ ही विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण किया जाएगा।
30 जनवरी को शहीद दिवस के अवसर पर पार्टी मनरेगा मजदूरों के साथ वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना देगी।
तीसरा चरण: 31 जनवरी से 25 फरवरी
वेणुगोपाल ने कहा कि आंदोलन का तीसरा चरण 31 जनवरी से शुरू होगा।
31 जनवरी से 6 फरवरी तक डीसी और डीएम कार्यालयों पर जिला-स्तरीय “मनरेगा बचाओ” धरने दिए जाएंगे।
इसके बाद 7 फरवरी से 15 फरवरी तक राज्य-स्तर पर विधानसभा भवनों का घेराव किया जाएगा।
16 से 25 फरवरी के बीच देश भर में कांग्रेस की चार बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी।
सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह आंदोलन 8 जनवरी से शुरू होगा और इसका उद्देश्य मनरेगा को बचाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को सेंट्रलाइज करने की कोशिश कर रही है।
रमेश ने कहा कि सरकार मनमानी कर रही है और कांग्रेस नई रोजगार योजना को अदालत में चुनौती देगी। पत्रकारों के सवालों के जवाब में केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह कांग्रेस का कार्यक्रम है, लेकिन विपक्षी दलों से भी बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष साथ आना चाहे तो कांग्रेस स्वागत करेगी और इस मुद्दे पर सरकार को बेनकाब किया जाएगा। जयराम रमेश ने भी कहा कि संसद सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने नए मनरेगा कानून का विरोध किया था। अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारें हैं और कांग्रेस सभी से संवाद कर उन्हें इस आंदोलन में शामिल करने का प्रयास करेगी।
महात्मा गांधी का नाम हटाना निंदनीय: कांग्रेस
केसी वेणुगोपाल ने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को “सबसे निंदनीय काम” बताया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सिर्फ एक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि उन्होंने श्रम की गरिमा, ग्राम स्वराज और राज्य की नैतिक जिम्मेदारी का प्रतिनिधित्व किया है। उनके अनुसार गांधी का नाम हटाना मनरेगा के पीछे की अधिकार-आधारित सोच को ही समाप्त करने की कोशिश को दर्शाता है।




