Thursday, March 12, 2026
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कर्जमाफी पर संजय राउत का सरकार पर हमला:क्या किसानों की आत्महत्या के बाद होगा कर्ज माफ?

मुंबई। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले महायुति सरकार द्वारा किए गए किसानों की 100 प्रतिशत कर्जमाफी के वादे पर अब विपक्ष हमलावर हो गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने रविवार को सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि “क्या किसानों का कर्ज तभी माफ किया जाएगा जब वे आत्महत्या कर लेंगे? राउत ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, “चुनाव से पहले सरकार ने कहा था कि सत्ता में आने पर किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाएगा। लेकिन छह महीने बीत गए, कर्जमाफी का कुछ अता-पता नहीं। क्या सरकार 12,000 किसानों की आत्महत्या का इंतजार कर रही है? अब तक 2,000 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
‘2100 रुपये कब मिलेंगे?’
महायुति सरकार की ‘लाडकी बहना योजना’ का जिक्र करते हुए राउत ने कहा, “चुनाव के वक़्त कहा गया था कि बहनों को हर महीने ₹2100 दिए जाएंगे। अब वो पैसे कहां हैं? जनता से झूठे वादे कर वोट ले लिए, लेकिन अब कुछ नहीं दिया जा रहा।”
“कर्जमाफी करके मुर्दे की खोपड़ी से मक्खन खा रहे हैं”
सरकार की नीति पर हमला बोलते हुए राउत ने कहा, “कर्जमाफी के नाम पर सरकार सिर्फ चुनावी जुमले दे रही है। लगता है मानो ये लोग मुर्दे की खोपड़ी से मक्खन खा रहे हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार को लेकर भी राउत ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, अजित पवार चीनी कारखाने के चुनाव के लिए 15 दिनों से वहीं बैठे हैं। वो कहते हैं कि मुझे अध्यक्ष बना दो, मैं सरकार से 500 करोड़ ले आऊंगा। सवाल ये है कि 500 करोड़ किससे और कैसे लाएंगे? क्या ये धन जनता के लिए होगा या किसी और के लिए? राउत ने संदीप देशपांडे का नाम लिए बिना मनसे नेताओं पर भी टिप्पणी की और कहा, “राजनीति में उथलापन नहीं चलता। धैर्य और त्याग ही असली नेतृत्व की पहचान है। कुछ लोगों को अभी प्रशिक्षण की ज़रूरत है।
राज-उद्धव गठबंधन पर बोले राउत
मनसे और शिवसेना (UBT) के संभावित गठबंधन पर राउत ने कहा, “राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दो भाई हैं, फैसला वही लेंगे। कुछ लोग जो आज हमारे बारे में बोल रहे हैं, वे राजनीति में बहुत नए हैं। मैं ठाकरे बंधुओं को वर्षों से जानता हूं – अगर दोनों साथ आते हैं तो यह बहुत अहम राजनीतिक संकेत होगा। राउत के इस आक्रामक तेवर से साफ है कि आगामी समय में महायुति सरकार पर किसानों के मुद्दे, आर्थिक नीतियों और नेतृत्व के सवाल पर विपक्ष का हमला और तेज़ होगा।

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