
मुंबई। सड़क दुर्घटनाओं में घायल नागरिकों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू ‘पीएम-राहत योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर महाराष्ट्र सरकार ने जोर दिया है। प्रकाश आबिटकर ने कहा कि ‘गोल्डन ऑवर’ में त्वरित उपचार देकर मृत्यु दर कम करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को प्रतिबद्ध होकर काम करना होगा। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अधिकतम 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का इलाज पूरी तरह कैशलेस उपलब्ध कराया जाएगा।
इन योजनाओं से जुड़े अस्पतालों में मिलेगा लाभ
इस योजना के अंतर्गत आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना से जुड़े (अंगीकृत) अस्पतालों में भर्ती मरीजों को तत्काल उपचार मिलेगा। मंत्री ने कहा कि कई बार आर्थिक तंगी के कारण दुर्घटना पीड़ितों का इलाज समय पर नहीं हो पाता, जिससे मौत का खतरा बढ़ जाता है। ‘पीएम-राहत’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से इस समस्या में कमी आएगी।
राज्य स्वास्थ्य सोसायटी की अहम भूमिका
राज्य आरोग्य हमी सोसायटी महाराष्ट्र को योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इसमें घायल को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना, पुलिस से दुर्घटना की पुष्टि कराना और उपचार की मंजूरी देना शामिल है। राज्य में इस योजना के लिए राज्य रस्ते सुरक्षा परिषद को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है, जबकि अंतिम भुगतान परिवहन विभाग के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती होने वाले सभी भारतीय और विदेशी नागरिकों को लाभ मिलेगा। इलाज का खर्च दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक कवर किया जाएगा।
इमरजेंसी में 112 पर करें संपर्क
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि दुर्घटना की स्थिति में तुरंत 112 नंबर पर संपर्क करें, ताकि समय पर सहायता और उपचार उपलब्ध कराया जा सके। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें ई. रविंद्रन, डॉ. कादंबरी बलकवडे और अण्णासाहेब चव्हाण सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।




