
मुंबई। भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। आर्थिक स्थिरता बनाए रखने, डिजिटल लेन-देन में वैश्विक नेतृत्व दिलाने और वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने में आरबीआई का योगदान सराहनीय है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज मुंबई के नरिमन पॉइंट स्थित एनसीपीए में आयोजित भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के 90वें स्थापना दिवस समारोह में यह विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, अजीत पवार और आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा उपस्थित थे। राष्ट्रपति ने कहा कि 1935 में स्थापित भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्वतंत्रता-पूर्व के कठिन दौर से लेकर आज तक देश की आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरबीआई ने नाबार्ड, आईडीबीआई, सिडबी और नेशनल हाउसिंग बैंक जैसी वित्तीय संस्थाओं की स्थापना की जो कृषि, लघु व्यवसाय और आवास क्षेत्र में योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने लीड बैंक योजना और प्रधानमंत्री जन धन योजना के जरिए वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया। यूपीआई (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों के जरिए भारत डिजिटल लेन-देन में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन चुका है। राष्ट्रपति ने आरबीआई की साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण और वित्तीय साक्षरता को लेकर उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने ग्रीन डिपॉजिट फ्रेमवर्क और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) जैसी नीतियों के जरिए हरित वित्त पोषण को बढ़ावा दिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आरबीआई जनता के विश्वास की सबसे बड़ी पूंजी है और यह विश्वास बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “केवल एक हस्ताक्षर से आरबीआई गवर्नर का हस्ताक्षर एक साधारण कागज के टुकड़े को मुद्रा बना देता है। यह ताकत किसी अन्य हस्ताक्षर में नहीं है।” इस अवसर पर विशेष डाक टिकट का अनावरण किया गया, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आरबीआई के योगदान को रेखांकित किया और आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्वागत भाषण दिया। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि आरबीआई भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।




